अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अपडर डरेउँ न सोच समूलें। रबिहि न दोसु देव दिसि भूलें।।
मूल पाठ
अपडर डरेउँ न सोच समूलें। रबिहि न दोसु देव दिसि भूलें।।
मोर अभागु मातु कुटिलाई। बिधि गति बिषम काल कठिनाई।।
स्रोत अभिलेख 2.267 · पुस्तक पृ. 566, 566
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं मिथ्या डरसे ही डर गया था। मेरे सोचकी जड़ ही न थी। दिशा भूल जानेपर हे देव! सूर्यका दोष नहीं है। मेरा दुर्भाग्य, माताकी कुटिलता, विधाताकी टेढ़ी चाल और कालकी कठिनता,॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 566 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अपडर डरेउँ न सोच समूलें। रबिहि न दोसु देव दिसि भूलें।।
English explanation
I was frightened by my own fear; my anxiety had no real foundation. Lord, the sun is not to blame when someone mistakes the direction.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अपडर | अपने ही भय से | from my own fear |
| डरेउँ | मैं डर गया | I became afraid |
| न | नहीं | not |
| सोच | चिंता | anxiety |
| समूलें | वास्तविक आधार वाली | having a real foundation |
| रबिहि | सूर्य को | to the sun |
| न | नहीं | no |
| दोसु | दोष | blame |
| देव | हे देव | O Lord |
| दिसि | दिशा | the direction |
| भूलें | भूल जाने पर | when one mistakes it |
2 मोर अभागु मातु कुटिलाई। बिधि गति बिषम काल कठिनाई।।
English explanation
My misfortune, my mother's crookedness, the adverse course of destiny, and the hardship of the times—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोर | मेरा | my |
| अभागु | दुर्भाग्य | misfortune |
| मातु | माता की | my mother's |
| कुटिलाई | कुटिलता | crookedness |
| बिधि | विधाता की | of destiny |
| गति | चाल | course |
| बिषम | विषम, प्रतिकूल | adverse |
| काल | समय की | of the times |
| कठिनाई | कठिनाई | hardship |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.267
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 566
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 566, 566
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।