अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहौं कहावौं का अब स्वामी। कृपा अंबुनिधि अंतरजामी।।
मूल पाठ
कहौं कहावौं का अब स्वामी। कृपा अंबुनिधि अंतरजामी।।
गुर प्रसन्न साहिब अनुकूला। मिटी मलिन मन कलपित सूला।।
स्रोत अभिलेख 2.267 · पुस्तक पृ. 566, 566
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे स्वामी! हे कृपाके समुद्र! हे अन्तर्यामी! अब मैं [अधिक] क्या कहूँ और क्या कहाऊँ? गुरु महाराजको प्रसन्न और स्वामीको अनुकूल जानकर मेरे मलिन मनकी कल्पित पीड़ा मिट गयी॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 566 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहौं कहावौं का अब स्वामी। कृपा अंबुनिधि अंतरजामी।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: Master, what should I now say or have conveyed? You are an ocean of compassion and know every heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहौं | मैं कहूँ | should I say |
| कहावौं | मैं कहलवाऊँ | should I have conveyed |
| का | क्या | what |
| अब | अब | now |
| स्वामी | हे स्वामी राम | O Lord Rama |
| कृपा | करुणा का | of compassion |
| अंबुनिधि | समुद्र | ocean |
| अंतरजामी | सबके अंतःकरण को जानने वाले | knower of every heart |
2 गुर प्रसन्न साहिब अनुकूला। मिटी मलिन मन कलपित सूला।।
English explanation
The guru is pleased and my lord is gracious; the pain imagined by my troubled mind has vanished.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु | the guru |
| प्रसन्न | प्रसन्न हैं | is pleased |
| साहिब | स्वामी राम | my lord Rama |
| अनुकूला | अनुकूल हैं | is graciously disposed |
| मिटी | मिट गई | has vanished |
| मलिन | मलिन, दुःखग्रस्त | troubled and clouded |
| मन | मन द्वारा | by the mind |
| कलपित | कल्पित | imagined |
| सूला | पीड़ा | pain |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.267
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 566
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 566, 566
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।