अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पाउ रोपि सब मिलि मोहि घाला। प्रनतपाल पन आपन पाला।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइन सबने मिलकर पैर रोपकर (प्रण करके) मुझे नष्ट कर दिया था। परन्तु शरणागतके रक्षक आपने अपना [शरणागतकी रक्षाका] प्रण निबाहा (मुझे बचा लिया)। यह आपकी कोई नयी रीति नहीं है। यह लोक और वेदोंमें प्रकट है, छिपी नहीं है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 566 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पाउ रोपि सब मिलि मोहि घाला। प्रनतपाल पन आपन पाला।।
यह नइ रीति न राउरि होई। लोकहुँ बेद बिदित नहिं गोई।।
स्रोत अभिलेख 2.267 · पुस्तक पृ. 566, 566
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पाउ रोपि सब मिलि मोहि घाला। प्रनतपाल पन आपन पाला।।
English explanation
All these joined forces, firmly planted themselves, and cast me into distress; protector of those who seek refuge, you kept your pledge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पाउ | पैर | their feet |
| रोपि | जमाकर | planting firmly |
| सब | सबने | all these |
| मिलि | मिलकर | together |
| मोहि | मुझे | me |
| घाला | संकट में डाल दिया | cast into distress |
| प्रनतपाल | हे शरणागतों के पालक | O protector of those seeking refuge |
| पन | प्रण | pledge |
| आपन | अपना | your own |
| पाला | निभाया | kept |
2 यह नइ रीति न राउरि होई। लोकहुँ बेद बिदित नहिं गोई।।
English explanation
This way of yours is not new; it is known in the world and the Vedas, not hidden.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| नइ | नई | new |
| रीति | रीति | way of acting |
| न | नहीं | not |
| राउरि | आपकी | yours |
| होई | है | is |
| लोकहुँ | लोक में भी | in the world too |
| बेद | वेद में | in the Vedas |
| बिदित | प्रसिद्ध | well known |
| नहिं | नहीं | not |
| गोई | छिपी हुई | hidden |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.267
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 566
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 566, 566
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।