अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जगु अनभल भल एकु गोसाईं। कहिअ होइ भल कासु भलाईं।।
मूल पाठ
जगु अनभल भल एकु गोसाईं। कहिअ होइ भल कासु भलाईं।।
देउ देवतरु सरिस सुभाऊ। सनमुख बिमुख न काहुहि काऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.267 · पुस्तक पृ. 566, 566
भावार्थ
मूल पाठ के बादसारा जगत् बुरा [करनेवाला] हो; किन्तु हे स्वामी! केवल एक आप ही भले (अनुकूल) हों, तो फिर कहिये, किसकी भलाईसे भला हो सकता है? हे देव! आपका स्वभाव कल्पवृक्षके समान है; वह न कभी किसीके सम्मुख (अनुकूल) है, न विमुख (प्रतिकूल)॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 566 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जगु अनभल भल एकु गोसाईं। कहिअ होइ भल कासु भलाईं।।
English explanation
The world is unkind; you alone are good, Master. Tell me, through whose goodness does anyone become good?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जगु | जगत | the world |
| अनभल | बुरा, अहितकारी | unkind, harmful |
| भल | भले | good |
| एकु | एक आप ही | you alone |
| गोसाईं | हे स्वामी | O Master |
| कहिअ | कहिए | tell me |
| होइ | होता है | becomes |
| भल | भला | good |
| कासु | किसकी | whose |
| भलाईं | भलाई से | through goodness |
2 देउ देवतरु सरिस सुभाऊ। सनमुख बिमुख न काहुहि काऊ।।
English explanation
Lord, your nature is like the wish-fulfilling tree: it is never of itself partial or hostile toward anyone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देउ | हे देव | O Lord |
| देवतरु | कल्पवृक्ष | the wish-fulfilling celestial tree |
| सरिस | के समान | like |
| सुभाऊ | स्वभाव | nature |
| सनमुख | अनुकूल, किसी की ओर उन्मुख | favorable, turned toward someone |
| बिमुख | प्रतिकूल, किसी से विमुख | hostile, turned away |
| न | नहीं | not |
| काहुहि | किसी के प्रति | toward anyone |
| काऊ | कभी | ever |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.267
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 566
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 566, 566
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।