अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अति लालसा बसहिं मन माहीं। नाउँ गाउँ बूझत सकुचाहीं।।
मूल पाठ
अति लालसा बसहिं मन माहीं। नाउँ गाउँ बूझत सकुचाहीं।।
जे तिन्ह महुँ बयबिरिध सयाने। तिन्ह करि जुगुति रामु पहिचाने।।
स्रोत अभिलेख 2.11 · पुस्तक पृ. 434, 435
भावार्थ
मूल पाठ के बादउनके मनमें [परिचय जाननेकी] बहुत-सी लालसाएँ भरी हैं। पर वे नाम-गाँव पूछते सकुचाते हैं। उन लोगोंमें जो वयोवृद्ध और चतुर थे; उन्होंने युक्तिसे श्रीरामचन्द्रजीको पहचान लिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 434 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अति लालसा बसहिं मन माहीं। नाउँ गाउँ बूझत सकुचाहीं।।
English explanation
Great eagerness fills their hearts, but they hesitate to ask the visitors' names and home village.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | बहुत | great |
| लालसा | जानने की उत्कंठा | eagerness to know |
| बसहिं | बसती है | dwells |
| मन | मन | the heart |
| माहीं | में | within |
| नाउँ | नाम | names |
| गाउँ | गाँव | home village |
| बूझत | पूछते समय | when asking |
| सकुचाहीं | संकोच करते हैं | they hesitate |
2 जे तिन्ह महुँ बयबिरिध सयाने। तिन्ह करि जुगुति रामु पहिचाने।।
English explanation
Those among them who were elderly and discerning recognized Rama through reasoning.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो | those who |
| तिन्ह | उन लोगों | those people |
| महुँ | में | among |
| बयबिरिध | आयु में बड़े | advanced in age |
| सयाने | समझदार | discerning |
| तिन्ह | उन्होंने | they |
| करि | करके | having applied |
| जुगुति | युक्ति-विचार | reasoning |
| रामु | राम को | Rama |
| पहिचाने | पहचान लिया | recognized |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 434
- सहायक विषय
- प्रयाग पहुँचना, श्रीराम-भरद्वाज-संवाद, यमुनातीरनिवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 434, 435
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।