अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अति अनुराग अंब उर लाए। नयन सनेह सलिल अन्हवाए।।
मूल पाठ
अति अनुराग अंब उर लाए। नयन सनेह सलिल अन्हवाए।।
तेहि अवसर कर हरष बिषादू। किमि कबि कहै मूक जिमि स्वादू।।
स्रोत अभिलेख 2.245 · पुस्तक पृ. 547, 548
भावार्थ
मूल पाठ के बादबड़े ही स्नेहसे माताने उन्हें हृदयसे लगा लिया और नेत्रोंसे बहे हुए प्रेमाश्रुओंके जलसे उन्हें नहला दिया। उस समयके हर्ष और विषादको कवि कैसे कहे ? जैसे गूँगा स्वादको कैसे बतावे?॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 548 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अति अनुराग अंब उर लाए। नयन सनेह सलिल अन्हवाए।।
English explanation
Their mother embraced them with immense affection and bathed them in the loving tears of her eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | immense |
| अनुराग | स्नेह से | with affection |
| अंब | माता ने | the mother |
| उर | हृदय से | to her heart |
| लाए | लगा लिया | held them close |
| नयन | आँखों के | of her eyes |
| सनेह | प्रेम के | of love |
| सलिल | जल से—आँसुओं से | with water—tears |
| अन्हवाए | नहला दिया | bathed them |
2 तेहि अवसर कर हरष बिषादू। किमि कबि कहै मूक जिमि स्वादू।।
English explanation
How can a poet describe the joy and sorrow of that moment? They are as inexpressible as a mute person’s experience of taste.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उस | that |
| अवसर | अवसर | moment |
| कर | का | of |
| हरष | हर्ष | joy |
| बिषादू | विषाद | sorrow |
| किमि | कैसे | how |
| कबि | कवि | a poet |
| कहै | कहे | can describe |
| मूक | बोल न सकने वाला व्यक्ति | a person unable to speak |
| जिमि | जैसे | like |
| स्वादू | स्वाद का अनुभव | the experience of taste |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.245
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 548
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 547, 548
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।