अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मिलि जननहि सानुज रघुराऊ। गुर सन कहेउ कि धारिअ पाऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरघुनाथजीने छोटे भाई लक्ष्मणजीसहित माता कौसल्यासे मिलकर गुरुसे कहा कि आश्रमपर पधारिये। तदनन्तर मुनीश्वर वसिष्ठजीकी आज्ञा पाकर अयोध्यावासी सब लोग जल और थलका सुभीता देख-देखकर उतर गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 548 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मिलि जननहि सानुज रघुराऊ। गुर सन कहेउ कि धारिअ पाऊ।।
पुरजन पाइ मुनीस नियोगू। जल थल तकि तकि उतरेउ लोगू।।
स्रोत अभिलेख 2.245 · पुस्तक पृ. 547, 548
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मिलि जननहि सानुज रघुराऊ। गुर सन कहेउ कि धारिअ पाऊ।।
English explanation
After meeting his mother with his younger brother, Rama asked the guru to kindly come.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मिलि | मिलकर | having met |
| जननहि | माता से | his mother |
| सानुज | छोटे भाई लक्ष्मण सहित | with his younger brother Lakshmana |
| रघुराऊ | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| गुर | गुरु वसिष्ठ | the guru Vashishtha |
| सन | से | to |
| कहेउ | कहा | said |
| कि | कि | that |
| धारिअ | कृपया रखिए | please place |
| पाऊ | चरण | your feet |
2 पुरजन पाइ मुनीस नियोगू। जल थल तकि तकि उतरेउ लोगू।।
English explanation
Receiving the chief sage’s directions, the townspeople checked the water and terrain and settled into camp.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुरजन | नगरवासी | townspeople |
| पाइ | पाकर | having received |
| मुनीस | मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठ की | of Vashishtha, the chief sage |
| नियोगू | आज्ञा | directions |
| जल | जल की सुविधा | water availability |
| थल | भूमि | terrain |
| तकि | देखकर | checking |
| तकि | बार-बार देखकर | checking carefully |
| उतरेउ | डेरा डालकर ठहरा | settled into camp |
| लोगू | लोगों का समूह | the people |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.245
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 548
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 547, 548
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