अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गहि पद लगे सुमित्रा अंका। जनु भेटीं संपति अति रंका।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतब दोनों भाई पैर पकड़कर सुमित्राजीकी गोदमें जा चिपटे। मानो किसी अत्यन्त दरिद्रको सम्पत्तिसे भेंट हो गयी हो। फिर दोनों भाई माता कौसल्याजीके चरणोंमें गिर पड़े। प्रेमके मारे उनके सारे अंग शिथिल हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 547 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
गहि पद लगे सुमित्रा अंका। जनु भेटीं संपति अति रंका।।
पुनि जननि चरननि दोउ भ्राता। परे पेम ब्याकुल सब गाता।।
स्रोत अभिलेख 2.245 · पुस्तक पृ. 547, 548
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गहि पद लगे सुमित्रा अंका। जनु भेटीं संपति अति रंका।।
English explanation
Clasping her feet, the brothers nestled into Sumitra’s lap, as though someone utterly poor had found wealth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गहि | पकड़कर | having clasped |
| पद | चरण | her feet |
| लगे | लग गए | nestled into |
| सुमित्रा | लक्ष्मण की माता सुमित्रा की | of Sumitra, Lakshmana’s mother |
| अंका | गोद में | her lap |
| जनु | मानो | as though |
| भेटीं | मिल गई हो | had been found |
| संपति | संपत्ति | wealth |
| अति | अत्यंत | utterly |
| रंका | निर्धन को | by a poor person |
2 पुनि जननि चरननि दोउ भ्राता। परे पेम ब्याकुल सब गाता।।
English explanation
Then both brothers fell at Mother Kaushalya’s feet, their entire bodies overwhelmed with love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| जननि | माता कौसल्या के | of Mother Kaushalya |
| चरननि | चरणों में | at the feet |
| दोउ | दोनों | both |
| भ्राता | भाई | brothers |
| परे | गिर पड़े | fell down |
| पेम | प्रेम से | with love |
| ब्याकुल | व्याकुल | overwhelmed |
| सब | पूरा | entire |
| गाता | शरीर | body |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.245
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 547
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 547, 548
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