अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अटनु राम गिरि बन तापस थल। असनु अमिअ सम कंद मूल फल।।
मूल पाठ
अटनु राम गिरि बन तापस थल। असनु अमिअ सम कंद मूल फल।।
सुख समेत संबत दुइ साता। पल सम होहिं न जनिअहिं जाता।।
स्रोत अभिलेख 2.28 · पुस्तक पृ. 577, 578
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजीके पर्वत (कामदनाथ), वन और तपस्वियोंके स्थानोंमें घूमना और अमृतके समान कन्द, मूल, फलोंका भोजन। चौदह वर्ष सुखके साथ पलके समान हो जायँगे (बीत जायँगे), जाते हुए जान ही न पड़ेंगे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 577 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अटनु राम गिरि बन तापस थल। असनु अमिअ सम कंद मूल फल।।
English explanation
There would be wandering on Rama’s hill, through the forest and the ascetics’ retreats, and eating tubers, roots, and fruits as sweet as nectar.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अटनु | घूमना | wandering |
| राम | राम का | Rama’s |
| गिरि | पर्वत | hill |
| बन | वन | forest |
| तापस | तपस्वियों के | ascetics’ |
| थल | स्थान; आश्रम | places; retreats |
| असनु | भोजन करना | eating |
| अमिअ | अमृत | nectar of immortality |
| सम | के समान | like |
| कंद | कंद | tubers |
| मूल | जड़ें | roots |
| फल | फल | fruits |
2 सुख समेत संबत दुइ साता। पल सम होहिं न जनिअहिं जाता।।
English explanation
With such happiness, fourteen years would seem like a moment; their passing would go unnoticed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुख | सुख | happiness |
| समेत | के साथ | with |
| संबत | वर्ष | years |
| दुइ | दो | two |
| साता | सात के समूह | groups of seven |
| पल | क्षण | moment |
| सम | के समान | like |
| होहिं | हो जाएँगे | would become |
| न | नहीं | not |
| जनिअहिं | जान पड़ेंगे | would be noticed |
| जाता | बीतते हुए | passing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 577
- सहायक विषय
- जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 577, 578
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।