अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अगम सबहि बरनत बरबरनी। जिमि जलहीन मीन गमु धरनी।।
मूल पाठ
अगम सबहि बरनत बरबरनी। जिमि जलहीन मीन गमु धरनी।।
भरत अमित महिमा सुनु रानी। जानहिं रामु न सकहिं बखानी।।
स्रोत अभिलेख 2.289 · पुस्तक पृ. 585, 586
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे श्रेष्ठ वर्णवाली! भरतजीकी महिमाका वर्णन करना सभीके लिये वैसे ही अगम है जैसे जलरहित पृथ्वीपर मछलीका चलना। हे रानी! सुनो, भरतजीकी अपरिमित महिमाको एक श्रीरामचन्द्रजी ही जानते हैं; किन्तु वे भी उसका वर्णन नहीं कर सकते॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 585 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अगम सबहि बरनत बरबरनी। जिमि जलहीन मीन गमु धरनी।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: O beautiful queen, describing this is as impossible for anyone as it is for a fish without water to move on land.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अगम | असंभव; पहुँच से परे | impossible; beyond reach |
| सबहि | सबके लिए | for everyone |
| बरनत | वर्णन करना | to describe |
| बरबरनी | हे सुंदर रानी | O beautiful queen |
| जिमि | जैसे | just as |
| जलहीन | जल से रहित | without water |
| मीन | मछली | a fish |
| गमु | चलना; गमन | movement; moving |
| धरनी | धरती पर | on land |
2 भरत अमित महिमा सुनु रानी। जानहिं रामु न सकहिं बखानी।।
English explanation
Listen, O queen: Bharata’s greatness is boundless; Rama knows it but cannot describe it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत की | of Bharata, Rama’s brother |
| अमित | असीम | boundless |
| महिमा | महिमा | greatness |
| सुनु | सुनो | listen |
| रानी | हे रानी | O queen |
| जानहिं | जानते हैं | knows |
| रामु | राम | Rama |
| न | नहीं | not |
| सकहिं | सकते हैं | can |
| बखानी | वर्णन कर | describe |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.289
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 585
- सहायक विषय
- जनक-सुनयना-संवाद, भरतजीकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 585, 586
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।