अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बरनि सप्रेम भरत अनुभाऊ। तिय जिय की रुचि लखि कह राऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइस प्रकार प्रेमपूर्वक भरतजीके प्रभावका वर्णन करके, फिर पत्नीके मनकी रुचि जानकर राजाने कहा— लक्ष्मणजी लौट जायँ और भरतजी वनको जायँ, इसमें सभीका भला है और यही सबके मनमें है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 585 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बरनि सप्रेम भरत अनुभाऊ। तिय जिय की रुचि लखि कह राऊ।।
बहुरहिं लखनु भरतु बन जाहीं। सब कर भल सब के मन माहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.289 · पुस्तक पृ. 585, 586
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बरनि सप्रेम भरत अनुभाऊ। तिय जिय की रुचि लखि कह राऊ।।
English explanation
Having lovingly described Bharata’s greatness, the king perceived his wife’s wish and spoke.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरनि | वर्णन करके | having described |
| सप्रेम | प्रेमपूर्वक | with love |
| भरत | भरत का | of Bharata |
| अनुभाऊ | प्रभाव; महत्त्व | greatness; spiritual stature |
| तिय | पत्नी के | of his wife |
| जिय | हृदय | heart |
| की | की | of |
| रुचि | इच्छा | wish |
| लखि | देखकर; समझकर | having perceived |
| कह | कहा | said |
| राऊ | राजा जनक ने | King Janaka |
2 बहुरहिं लखनु भरतु बन जाहीं। सब कर भल सब के मन माहीं।।
English explanation
That Lakshmana should return and Bharata go to the forest would benefit everyone; this is what all have in mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरहिं | लौट आएँ | should return |
| लखनु | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| भरतु | भरत | Bharata |
| बन | वन में | to the forest |
| जाहीं | जाएँ | should go |
| सब | सबका | everyone’s |
| कर | का | of |
| भल | भला; हित | welfare; benefit |
| सब | सब | everyone |
| के | के | of |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में | in |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.289
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 585
- सहायक विषय
- जनक-सुनयना-संवाद, भरतजीकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 585, 586
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