अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देबि परंतु भरत रघुबर की। प्रीति प्रतीति जाइ नहिं तरकी।।
मूल पाठ
देबि परंतु भरत रघुबर की। प्रीति प्रतीति जाइ नहिं तरकी।।
भरतु अवधि सनेह ममता की। जद्यपि रामु सीम समता की।।
स्रोत अभिलेख 2.289 · पुस्तक पृ. 585, 586
भावार्थ
मूल पाठ के बादपरन्तु हे देवि! भरतजी और श्रीरामचन्द्रजीका प्रेम और एक-दूसरेपर विश्वास, बुद्धि और विचारकी सीमामें नहीं आ सकता। यद्यपि श्रीरामचन्द्रजी समताकी सीमा हैं, तथापि भरतजी प्रेम और ममताकी सीमा हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 585 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 देबि परंतु भरत रघुबर की। प्रीति प्रतीति जाइ नहिं तरकी।।
English explanation
But, O lady, the love and trust between Bharata and Rama cannot be fathomed through reasoning.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देबि | हे देवी | O lady |
| परंतु | परंतु | but |
| भरत | भरत | Bharata |
| रघुबर | राम | Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| की | की | of; between |
| प्रीति | प्रेम | love |
| प्रतीति | विश्वास | trust |
| जाइ | जा सकता है | can be |
| नहिं | नहीं | not |
| तरकी | तर्क से समझा | fathomed by reasoning |
2 भरतु अवधि सनेह ममता की। जद्यपि रामु सीम समता की।।
English explanation
Bharata is the utmost expression of affection and loving attachment, though Rama is the utmost expression of even-mindedness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरतु | भरत | Bharata |
| अवधि | पराकाष्ठा | highest limit |
| सनेह | स्नेह | affection |
| ममता | ममता; अपनापन | loving attachment |
| की | की | of |
| जद्यपि | यद्यपि | although |
| रामु | राम | Rama |
| सीम | सीमा; पराकाष्ठा | highest limit |
| समता | समभाव | even-mindedness; impartiality |
| की | की | of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.289
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 585
- सहायक विषय
- जनक-सुनयना-संवाद, भरतजीकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 585, 586
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।