अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परमारथ स्वारथ सुख सारे। भरत न सपनेहुँ मनहुँ निहारे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[श्रीरामचन्द्रजीके प्रति अनन्य प्रेमको छोड़कर] भरतजीने समस्त परमार्थ, स्वार्थ और सुखोंकी ओर स्वप्रमें भी मनसे भी नहीं ताका है। श्रीरामजीके चरणोंका प्रेम ही उनका साधन है और वही सिद्धि है। मुझे तो भरतजीका बस, यही एकमात्र सिद्धान्त जान पड़ता है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 585 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
परमारथ स्वारथ सुख सारे। भरत न सपनेहुँ मनहुँ निहारे।।
साधन सिद्ध राम पग नेहू।।मोहि लखि परत भरत मत एहू।।
स्रोत अभिलेख 2.289 · पुस्तक पृ. 585, 586
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 परमारथ स्वारथ सुख सारे। भरत न सपनेहुँ मनहुँ निहारे।।
English explanation
Bharata has not looked toward any pleasures of spiritual attainment or personal gain, even in dreams or in thought.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परमारथ | परमार्थ; आध्यात्मिक हित | spiritual good; ultimate benefit |
| स्वारथ | अपना हित | personal interest or gain |
| सुख | सुख | pleasures |
| सारे | सभी | all |
| भरत | भरत ने | Bharata |
| न | नहीं | not |
| सपनेहुँ | स्वप्न में भी | even in dreams |
| मनहुँ | मन से भी | even in thought |
| निहारे | देखे; दृष्टि डाली | looked toward |
2 साधन सिद्ध राम पग नेहू।।मोहि लखि परत भरत मत एहू।।
English explanation
Love for Rama’s feet is both the means and the attainment: this is what I understand Bharata’s view to be.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| साधन | साधन; प्राप्ति का उपाय | means of attainment |
| सिद्ध | सिद्धि; प्राप्त लक्ष्य | attainment; accomplished goal |
| राम | राम के | Rama’s |
| पग | चरण | feet |
| नेहू | प्रेम | love |
| मोहि | मुझे | to me |
| लखि | दिखाई | perceived |
| परत | पड़ता है | becomes; is |
| भरत | भरत का | Bharata’s |
| मत | मत; विचार | view; conviction |
| एहू | यही | this very |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.289
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 585
- सहायक विषय
- जनक-सुनयना-संवाद, भरतजीकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 585, 586
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।