अरण्यकाण्ड · सोरठा 18 · सोरठा
आइ गए बगमेल धरहु धरहु धावत सुभट।
मूल पाठ
आइ गए बगमेल धरहु धरहु धावत सुभट।
जथा बिलोकि अकेल बाल रबिहि घेरत दनुज॥ १८॥
स्रोत अभिलेख 3.18 · पुस्तक पृ. 643, 644
भावार्थ
मूल पाठ के बाद'पकड़ो-पकड़ो पुकारते हुए राक्षस योद्धा बाग छोड़कर (बड़ी तेजीसे) दौड़े हुए आये [और उन्होंने श्रीरामजीको चारों ओरसे घेर लिया], जैसे बालसूर्य (उदयकालीन सूर्य) को अकेला देखकर मन्देह नामक दैत्य घेर लेते हैं॥ १८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 644 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1आइ गए बगमेल धरहु धरहु धावत सुभट।
English explanation
The formidable warriors came rushing at full speed, crying, “Seize him! Seize him!”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आइ | आकर | having come |
| गए | पहुँच गए | arrived |
| बगमेल | सरपट; अत्यंत तेज चाल से | at a gallop; at full speed |
| धरहु | पकड़ो! | Seize him! |
| धरहु | पकड़ो! | Seize him! |
| धावत | दौड़ते हुए | rushing; running |
| सुभट | वीर योद्धा | formidable warriors |
2जथा बिलोकि अकेल बाल रबिहि घेरत दनुज॥ १८॥
English explanation
They surrounded Rama as demons might surround the rising sun upon seeing it alone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जथा | जैसे | just as |
| बिलोकि | देखकर | having seen |
| अकेल | अकेला | alone |
| बाल | बाल; अभी उगता हुआ | young; newly rising |
| रबिहि | सूर्य को | the sun |
| घेरत | घेरते हैं | surround |
| दनुज | दानव; असुर | demons |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- सोरठा 18
- स्रोत अभिलेख
- 3.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 644
- सहायक विषय
- शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका खर-दूषणके पास जाना और खर-दूषणादिका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 643, 644
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।