अरण्यकाण्ड · छंद · छंद
कोदंड कठिन चढ़ाइ सिर जट जूट बाँधत सोह क्यों।
मूल पाठ
कोदंड कठिन चढ़ाइ सिर जट जूट बाँधत सोह क्यों।
मरकत सयल पर लरत दामिनि कोटि सों जुग भुजग ज्यों॥
कटि कसि निषंग बिसाल भुज गहि चाप बिसिख सुधारि कै।
चितवत मनहुँ मृगराज प्रभु गजराज घटा निहारि कै॥
स्रोत अभिलेख 3.18 · पुस्तक पृ. 643, 644
भावार्थ
मूल पाठ के बादकठिन धनुष चढ़ाकर सिरपर जटाका जूड़ा बाँधते हुए प्रभु कैसे शोभित हो रहे हैं, जैसे मरकतमणि (पन्ने) के पर्वतपर करोड़ों बिजलियोंसे दो साँप लड़ रहे हों। कमरमें तरकस कसकर, विशाल भुजाओंमें धनुष लेकर और बाण सुधारकर प्रभु श्रीरामचन्द्रजी राक्षसोंकी ओर देख रहे हैं। मानो मतवाले हाथियोंके समूहको [आता] देखकर सिंह [उनकी ओर] ताक रहा हो।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 644 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1कोदंड कठिन चढ़ाइ सिर जट जूट बाँधत सोह क्यों।
English explanation
AI draft: How splendid Rama looks, stringing his stiff bow and binding his matted hair into a knot upon his head!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोदंड | श्रीराम का धनुष | Rama’s bow |
| कठिन | कठोर; जिसे चढ़ाना कठिन हो | stiff; difficult to string |
| चढ़ाइ | प्रत्यंचा चढ़ाकर | having strung it |
| सिर | सिर पर | upon the head |
| जट | जटाएँ | matted locks |
| जूट | जूड़ा; बँधा हुआ समूह | a knot or gathered mass |
| बाँधत | बाँधते हुए | while binding |
| सोह | शोभित होते हैं | look splendid |
| क्यों | कैसे; किस अनुपम ढंग से | how splendidly |
2मरकत सयल पर लरत दामिनि कोटि सों जुग भुजग ज्यों॥
English explanation
It is as though a pair of serpents upon an emerald mountain were contending with countless flashes of lightning—a likeness of his arms and bow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मरकत | पन्ना; हरे रंग का रत्न | emerald |
| सयल | पर्वत | mountain |
| पर | पर | upon |
| लरत | लड़ते हुए | contending; fighting |
| दामिनि | बिजली | lightning |
| कोटि | करोड़ों; असंख्य | millions; countless |
| सों | से; के साथ | with; against |
| जुग | दो; एक जोड़ी | two; a pair |
| भुजग | सर्प | serpents |
| ज्यों | जैसे; मानो | like; as though |
3कटि कसि निषंग बिसाल भुज गहि चाप बिसिख सुधारि कै।
English explanation
Having fastened the quiver at his waist, grasped the bow with his mighty arms, and readied an arrow,
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कटि | कमर में | at the waist |
| कसि | कसकर बाँधकर | having fastened securely |
| निषंग | तरकस | quiver |
| बिसाल | विशाल; बड़ी | large; mighty |
| भुज | भुजाओं से | with his arms |
| गहि | पकड़कर | having grasped |
| चाप | धनुष | bow |
| बिसिख | बाण | arrow |
| सुधारि | ठीक करके; तैयार करके | having adjusted; readied |
| कै | करके | having done so |
4चितवत मनहुँ मृगराज प्रभु गजराज घटा निहारि कै॥
English explanation
Lord Rama gazes as though he were a lion surveying a herd of mighty elephants.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चितवत | देख रहे हैं | gazes; looks on |
| मनहुँ | मानो | as though |
| मृगराज | सिंह; पशुओं का राजा | lion; king of beasts |
| प्रभु | प्रभु श्रीराम | Lord Rama |
| गजराज | विशाल हाथियों का | of mighty elephants |
| घटा | झुंड; घना समूह | herd; dense gathering |
| निहारि | देखकर | having surveyed |
| कै | करके | having done so |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 3.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 644
- सहायक विषय
- शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका खर-दूषणके पास जाना और खर-दूषणादिका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 643, 644
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।