अरण्यकाण्ड · दोहा 22 · दोहा/सोरठा
सुपनखहि समुझाइ करि बल बोलेसि बहु भाँति।
सुपनखहि समुझाइ करि बल बोलेसि बहु भाँति।
गयउ भवन अति सोचबस नीद परइ नहिं राति।।22।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.22 · पुस्तक पृ. 650, 651
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सुपनखहि समुझाइ करि बल बोलेसि बहु भाँति।
शूर्पणखा को समझाकर उसने अनेक प्रकार से अपने बल की बातें कहीं।
English explanation
After consoling Shurpanakha, he spoke in many ways of his own strength.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुपनखहि | शूर्पणखा को | to Shurpanakha, Ravana’s sister |
| समुझाइ | समझाकर, सांत्वना देकर | having consoled |
| करि | करके | having done so |
| बल | अपने बल की बातें | of his strength |
| बोलेसि | उसने कहा | he spoke |
| बहु | अनेक | many |
| भाँति | प्रकार से | in ways |
2 गयउ भवन अति सोचबस नीद परइ नहिं राति।।22।।
वह अत्यंत चिंता में डूबा अपने भवन गया; रात में उसे नींद नहीं आती।
English explanation
He went to his palace, overwhelmed by worry; sleep would not come to him at night.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गयउ | वह गया | he went |
| भवन | भवन, महल में | to his palace |
| अति | अत्यंत | deeply |
| सोचबस | चिंता के वश में | overcome by worry |
| नीद | नींद | sleep |
| परइ | आती है | comes |
| नहिं | नहीं | not |
| राति | रात में | at night |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 22
- स्रोत अभिलेख
- 3.22
- सहायक विषय
- शूर्पणखाका रावणके निकट जाना, श्रीसीताजीका अग्रि-प्रवेश और माया-सीता
- मुद्रित पृष्ठ
- 650, 651
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