अरण्यकाण्ड · दोहा 23 · दोहा/सोरठा
लछिमन गए बनहिं जब लेन मूल फल कंद।
लछिमन गए बनहिं जब लेन मूल फल कंद।
जनकसुता सन बोले बिहसि कृपा सुख बृंद।। 23।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.23 · पुस्तक पृ. 651, 652
भावार्थ और शब्दार्थ
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1लछिमन गए बनहिं जब लेन मूल फल कंद।
जब लक्ष्मण जड़ें, फल और कंद लेने वन में गए—
English explanation
When Lakshmana went into the forest to gather roots, fruits, and tubers—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लछिमन | लक्ष्मण, राम के छोटे भाई | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| गए | गए | went |
| बनहिं | वन में | into the forest |
| जब | जब | when |
| लेन | लेने के लिए | to gather |
| मूल | जड़ें | roots |
| फल | फल | fruits |
| कंद | कंद | tubers |
2 जनकसुता सन बोले बिहसि कृपा सुख बृंद।। 23।।
तब कृपा और सुख के पुंज राम मुस्कराकर जनक की पुत्री सीता से बोले।
English explanation
Then Rama, the embodiment of compassion and joy, smiled and spoke to Sita, Janaka’s daughter.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनकसुता | जनक की पुत्री सीता से | Janaka’s daughter, Sita |
| सन | से | to |
| बोले | बोले | spoke |
| बिहसि | मुस्कराकर | with a smile |
| कृपा | करुणा | compassion |
| सुख | आनंद | joy |
| बृंद | पुंज; मूर्त स्वरूप | embodiment; fullness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 23
- स्रोत अभिलेख
- 3.23
- सहायक विषय
- शूर्पणखाका रावणके निकट जाना, श्रीसीताजीका अग्रि-प्रवेश और माया-सीता
- मुद्रित पृष्ठ
- 651, 652
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