अरण्यकाण्ड · दोहा 24 · दोहा/सोरठा
करि पूजा मारीच तब सादर पूछी बात।
करि पूजा मारीच तब सादर पूछी बात।
कवन हेतु मन ब्यग्र अति अकसर आयहु तात।।24।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.24 · पुस्तक पृ. 652, 653
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1करि पूजा मारीच तब सादर पूछी बात।
तब मारीच ने आदर-सत्कार करके सम्मानपूर्वक पूछा।
English explanation
Then Maricha, having offered respectful hospitality, courteously asked a question.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having performed |
| पूजा | आदर-सत्कार | respectful reception |
| मारीच | मारीच ने | Maricha |
| तब | तब | then |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| पूछी | पूछी | asked |
| बात | बात; प्रश्न | a question |
2 कवन हेतु मन ब्यग्र अति अकसर आयहु तात।।24।।
हे तात, किस कारण आपका मन इतना व्याकुल है और आप असमय आए हैं?
English explanation
Dear sir, why is your mind so troubled, and why have you come at this unusual time?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कवन | किस | what; which |
| हेतु | कारण से | for reason |
| मन | मन | mind |
| ब्यग्र | व्याकुल | agitated; troubled |
| अति | अत्यंत | very |
| अकसर | असमय; अनपेक्षित समय पर | at an unusual or untimely hour |
| आयहु | आप आए हैं | you have come |
| तात | हे तात; आदरसूचक संबोधन | dear sir; respectful address |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 24
- स्रोत अभिलेख
- 3.24
- सहायक विषय
- मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 652, 653
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।