अरण्यकाण्ड · दोहा 5 (ख) · दोहा/सोरठा
सुनु सीता तव नाम सुमिर नारि पतिब्रत करहि।
सुनु सीता तव नाम सुमिर नारि पतिब्रत करहि।
तोहि प्रानप्रिय राम कहिउँ कथा संसार हित।।5(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.5 · पुस्तक पृ. 625, 627
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सुनु सीता तव नाम सुमिर नारि पतिब्रत करहि।
सुनो सीता, तुम्हारा नाम स्मरण करके स्त्रियाँ पतिव्रत का पालन करती हैं।
English explanation
Listen, Sita: remembering your name, women practice fidelity to their husbands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| सीता | हे सीता | O Sita |
| तव | तुम्हारा | your |
| नाम | नाम | name |
| सुमिर | स्मरण करके | remembering |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| पतिब्रत | पति के प्रति निष्ठा का व्रत | the vow of marital fidelity |
| करहि | पालन करती हैं | practice |
2तोहि प्रानप्रिय राम कहिउँ कथा संसार हित।।5(ख)।।
राम तुम्हें प्राणों के समान प्रिय हैं; मैंने यह कथा संसार के हित के लिए कही है।
English explanation
Rama is dear to you as life itself; I have spoken this account for the welfare of the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तोहि | तुम्हें | to you |
| प्रानप्रिय | प्राणों के समान प्रिय | dear as life itself |
| राम | सीता के पति राम | Rama, Sita’s husband |
| कहिउँ | मैंने कही | I have told |
| कथा | यह कथा; विवेचन | this account; exposition |
| संसार | संसार के | of the world |
| हित | कल्याण के लिए | for the welfare |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न (ख) | verse reference marker (b) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 5 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 3.5
- सहायक विषय
- श्रीसीता-अनसूया-मिलन और श्रीसीताजीको अनसूयाजीका पातिव्रतधर्म कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 625, 627
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।