अरण्यकाण्ड · दोहा 6 (क) · दोहा/सोरठा
कलिमल समन दमन मन राम सुजस सुखमूल।
कलिमल समन दमन मन राम सुजस सुखमूल।
सादर सुनहि जे तिन्ह पर राम रहहिं अनुकूल।।6(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.6 · पुस्तक पृ. 627, 628
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 कलिमल समन दमन मन राम सुजस सुखमूल।
राम का सुंदर यश कलियुग के पापों को शांत करने वाला, मन को संयमित करने वाला और सुख का मूल है।
English explanation
Rama's glorious renown dispels the impurities of the Kali age, restrains the mind, and is the source of happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कलिमल | कलियुग के पापों का | the impurities of the Kali age |
| समन | शमन करने वाला | dispelling |
| दमन | संयमित करने वाला | restraining |
| मन | मन को | the mind |
| राम | राम का | Rama's |
| सुजस | सुंदर यश | glorious renown |
| सुखमूल | सुख का मूल स्रोत | source of happiness |
2 सादर सुनहि जे तिन्ह पर राम रहहिं अनुकूल।।6(क)।।
जो इसे आदरपूर्वक सुनते हैं, उन पर राम सदा अनुकूल रहते हैं।
English explanation
Rama remains gracious toward those who listen to it reverently.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सादर | आदरपूर्वक | reverently |
| सुनहि | सुनते हैं | listen |
| जे | जो | those who |
| तिन्ह | उन | them |
| पर | पर | toward |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| रहहिं | रहते हैं | remains |
| अनुकूल | कृपालु; अनुकूल | gracious; favorable |
| क | पद-संदर्भ चिह्न (क) | verse reference marker (क) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 6 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 3.6
- सहायक विषय
- श्रीसीता-अनसूया-मिलन और श्रीसीताजीको अनसूयाजीका पातिव्रतधर्म कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 627, 628
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