अरण्यकाण्ड · दोहा 6 (ख) · दोहा/सोरठा
कठिन काल मल कोस धर्म न ग्यान न जोग जप।
कठिन काल मल कोस धर्म न ग्यान न जोग जप।
परिहरि सकल भरोस रामहि भजहिं ते चतुर नर।।6(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.6 · पुस्तक पृ. 627, 628
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 कठिन काल मल कोस धर्म न ग्यान न जोग जप।
इस कठिन, पापों के भंडार रूप समय में धर्म, ज्ञान, योग और जप का साधन नहीं बन पड़ता।
English explanation
In this harsh age, a storehouse of impurity, righteous practice, knowledge, yoga, and chanting are not readily accomplished.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कठिन | कठिन | harsh |
| काल | समय; कलियुग | age; the Kali age |
| मल | पापों का | of impurity |
| कोस | भंडार | storehouse |
| धर्म | धार्मिक आचरण | righteous practice |
| न | नहीं | not |
| ग्यान | आध्यात्मिक ज्ञान | spiritual knowledge |
| न | नहीं | not |
| जोग | योग-साधना | yogic practice |
| जप | मंत्र-जप | chanting |
2 परिहरि सकल भरोस रामहि भजहिं ते चतुर नर।।6(ख)।।
जो सभी अन्य भरोसे छोड़कर राम ही को भजते हैं, वे मनुष्य बुद्धिमान हैं।
English explanation
Those who abandon all other reliance and worship Rama alone are wise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परिहरि | छोड़कर | abandoning |
| सकल | सभी | all |
| भरोस | अन्य भरोसे | other supports and reliance |
| रामहि | राम ही को | Rama alone |
| भजहिं | भजते हैं | worship; devote themselves to |
| ते | वे | those |
| चतुर | बुद्धिमान | wise |
| नर | मनुष्य | people |
| ख | पद-संदर्भ चिह्न (ख) | verse reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 6 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 3.6
- सहायक विषय
- श्रीसीता-अनसूया-मिलन और श्रीसीताजीको अनसूयाजीका पातिव्रतधर्म कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 627, 628
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।