अरण्यकाण्ड · दोहा 7 · दोहा/सोरठा
देखी राम मुख पंकज मुनिबर लोचन भृंग।
देखी राम मुख पंकज मुनिबर लोचन भृंग।
सादर पान करत अति धन्य जन्म सरभंग।।7।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.7 · पुस्तक पृ. 628, 629
भावार्थ और शब्दार्थ
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1देखी राम मुख पंकज मुनिबर लोचन भृंग।
राम के मुख-कमल को देखकर श्रेष्ठ मुनि शरभंग के नेत्र भौंरों के समान हो गए—
English explanation
Seeing Rama’s lotus-like face, the noble sage Sharabhanga’s eyes became like bees—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखी | देखकर | having seen |
| राम | राम के | Rama’s |
| मुख | मुख | face |
| पंकज | कमल | lotus |
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनि के | of the noble sage |
| लोचन | नेत्र | eyes |
| भृंग | भौंरे | bees |
2 सादर पान करत अति धन्य जन्म सरभंग।।7।।
वे नेत्र-भौंरे आदरपूर्वक उस मुख-कमल का रस पी रहे हैं; शरभंग का जन्म अत्यंत धन्य है।
English explanation
Those bee-like eyes reverently drink in the lotus-like face; Sharabhanga’s birth is truly blessed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सादर | आदरपूर्वक | reverently |
| पान | रस पीना | drinking in its nectar |
| करत | कर रहे हैं | are doing |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| धन्य | धन्य | blessed |
| जन्म | जन्म | birth |
| सरभंग | शरभंग ऋषि का | of the sage Sharabhanga |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 7
- स्रोत अभिलेख
- 3.7
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका आगे प्रस्थान, विराध-वध और शरभङ्ग-प्रसङ्ग
- मुद्रित पृष्ठ
- 628, 629
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