अरण्यकाण्ड · दोहा 31 · दोहा/सोरठा
सीता हरन तात जनि कहहु पिता सन जाइ।।
सीता हरन तात जनि कहहु पिता सन जाइ।।
जौं मैं राम त कुल सहित कहिहि दसानन आइ।।31।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.31 · पुस्तक पृ. 662, 663
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सीता हरन तात जनि कहहु पिता सन जाइ।।
हे तात, वहाँ जाकर मेरे पिता से सीता के हरण की बात मत कहिए।
English explanation
Dear elder, when you go there, do not tell my father about Sita’s abduction.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीता | सीता का | of Sita |
| हरन | हरण | abduction |
| तात | हे तात | dear elder |
| जनि | मत | do not |
| कहहु | कहिए | tell |
| पिता | मेरे पिता दशरथ | my father Dasharatha |
| सन | से | to |
| जाइ | जाकर | having gone there |
2 जौं मैं राम त कुल सहित कहिहि दसानन आइ।।31।।
यदि मैं राम हूँ, तो रावण अपने कुल सहित वहाँ आकर स्वयं यह बात कहेगा।
English explanation
If I am truly Rama, Ravana will come there with his entire clan and tell him himself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| मैं | मैं | I |
| राम | राम हूँ | am Rama |
| त | तो | then |
| कुल | अपने कुल | his clan |
| सहित | सहित | together with |
| कहिहि | कहेगा | will tell |
| दसानन | दस मुखों वाला रावण | the ten-headed Ravana |
| आइ | आकर | having come there |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 31
- स्रोत अभिलेख
- 3.31
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका विलाप, जटायुका प्रसंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 662, 663
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