अरण्यकाण्ड · दोहा · दोहा
रावनारि जसु पावन गावहिं सुनहिं जे लोग।
मूल पाठ
रावनारि जसु पावन गावहिं सुनहिं जे लोग।
राम भगति दृढ़ पावहिं बिनु बिराग जप जोग॥ ४ ६ (क)॥
स्रोत अभिलेख 3.46 · पुस्तक पृ. 678, 679
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो लोग रावणके शत्रु श्रीरामजीका पवित्र यश गावेंगे और सुनेंगे, वे वैराग्य, जप और योगके बिना ही श्रीरामजीकी दृढ़ भक्ति पावेंगे॥ ४६ (क)॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 679 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1रावनारि जसु पावन गावहिं सुनहिं जे लोग।
English explanation
Those who sing and hear the sacred glory of Rama, the enemy of Ravana—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रावनारि | रावण के शत्रु श्रीराम का | of Rama, Ravana’s enemy |
| जसु | यश | glory |
| पावन | पवित्र करने वाला | purifying |
| गावहिं | गाते हैं | sing |
| सुनहिं | सुनते हैं | hear |
| जे | जो | who |
| लोग | लोग | people |
2राम भगति दृढ़ पावहिं बिनु बिराग जप जोग॥ ४ ६ (क)॥
English explanation
They attain steadfast devotion to Rama even without dispassion, repetition of sacred names, or yogic practice.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम की | to Rama |
| भगति | भक्ति | devotion |
| दृढ़ | अटल | steadfast |
| पावहिं | प्राप्त करते हैं | attain |
| बिनु | बिना | without |
| बिराग | वैराग्य | dispassion |
| जप | मंत्र या नाम का जप | repetition of a mantra or sacred name |
| जोग | योग-साधना | yogic practice |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न (क) | verse reference marker (क) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा
- स्रोत अभिलेख
- 3.46
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 679
- सहायक विषय
- संतोंके लक्षण और सत्संग-भजनके लिये प्रेरणा
- मुद्रित पृष्ठ
- 678, 679
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।