अरण्यकाण्ड · दोहा · दोहा
दीप सिखा सम जुबति तन मन जनि होसि पतंग।
मूल पाठ
दीप सिखा सम जुबति तन मन जनि होसि पतंग।
भजहि राम तजि काम मद करहि सदा सतसंग॥ ४ ६ (ख)॥
स्रोत अभिलेख 3.46 · पुस्तक पृ. 678, 679
भावार्थ
मूल पाठ के बादयुवती स्त्रियोंका शरीर दीपककी लौके समान है, हे मन! तू उसका पतिंगा न बन। काम और मदको छोड़कर श्रीरामचन्द्रजीका भजन कर और सदा सत्संग कर॥ ४६ (ख)॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 679 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1दीप सिखा सम जुबति तन मन जनि होसि पतंग।
English explanation
A young woman’s body is like a lamp’s flame; O mind, do not become a moth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दीप | दीपक की | of a lamp |
| सिखा | लौ | flame |
| सम | के समान | like |
| जुबति | युवती का | a young woman’s |
| तन | शरीर | body |
| मन | हे मन | O mind |
| जनि | मत | do not |
| होसि | तू बन | you become |
| पतंग | पतंगा | a moth |
2भजहि राम तजि काम मद करहि सदा सतसंग॥ ४ ६ (ख)॥
English explanation
Abandon lust and pride, worship Rama, and always keep holy company.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भजहि | भजन कर | worship |
| राम | श्रीराम का | Rama |
| तजि | त्यागकर | having abandoned |
| काम | कामवासना | lust |
| मद | अहंकार | pride |
| करहि | कर | practice |
| सदा | हमेशा | always |
| सतसंग | संतों और सज्जनों की संगति | company of saints and the virtuous |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न (ख) | verse reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा
- स्रोत अभिलेख
- 3.46
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 679
- सहायक विषय
- संतोंके लक्षण और सत्संग-भजनके लिये प्रेरणा
- मुद्रित पृष्ठ
- 678, 679
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।