अरण्यकाण्ड · दोहा 15 · दोहा/सोरठा
माया ईस न आपु कहुँ जान कहिअ सो जीव।
माया ईस न आपु कहुँ जान कहिअ सो जीव।
बंध मोच्छ प्रद सर्बपर माया प्रेरक सीव।।15।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.15 · पुस्तक पृ. 639, 640
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1माया ईस न आपु कहुँ जान कहिअ सो जीव।
जो माया, ईश्वर और अपने स्वरूप को नहीं जानता, उसे जीव कहा जाता है।
English explanation
One who does not know maya, the Lord, or oneself is called the individual soul.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| माया | माया | maya |
| ईस | ईश्वर | the Lord |
| न | नहीं | not |
| आपु | अपने स्वरूप | oneself; one's own nature |
| कहुँ | को | object marker |
| जान | जानता है | knows |
| कहिअ | कहा जाता है | is called |
| सो | वह | that one |
| जीव | जीव; व्यक्तिगत आत्मा | the individual soul |
2 बंध मोच्छ प्रद सर्बपर माया प्रेरक सीव।।15।।
जो बंधन और मोक्ष देने वाला, सबसे परे तथा माया को प्रेरित करने वाला है, वह ईश्वर है।
English explanation
The Lord is the giver of bondage and liberation, beyond all, and the impeller of maya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंध | बंधन | bondage |
| मोच्छ | मोक्ष; मुक्ति | liberation |
| प्रद | देने वाला | giver of |
| सर्बपर | सबसे परे; सबसे ऊपर | beyond all; supreme over all |
| माया | माया का | of maya |
| प्रेरक | प्रेरक; संचालक | impeller; director |
| सीव | ईश्वर; प्रभु | God; the Lord |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 15
- स्रोत अभिलेख
- 3.15
- सहायक विषय
- पञ्चवटी-निवास और श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 639, 640
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।