अरण्यकाण्ड · दोहा 14 · दोहा/सोरठा
ईस्वर जीव भेद प्रभु सकल कहौ समुझाइ।।
ईस्वर जीव भेद प्रभु सकल कहौ समुझाइ।।
जातें होइ चरन रति सोक मोह भ्रम जाइ।।14।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.14 · पुस्तक पृ. 638, 639
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 ईस्वर जीव भेद प्रभु सकल कहौ समुझाइ।।
हे प्रभु! ईश्वर और जीव का भेद पूरी तरह समझाकर बताइए।
English explanation
O Lord, fully explain the distinction between God and the individual soul.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ईस्वर | ईश्वर | God, the supreme lord |
| जीव | जीव; व्यक्तिगत आत्मा | the individual soul |
| भेद | अंतर | distinction |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| सकल | पूरा; समस्त | all; fully |
| कहौ | बताइए | tell me |
| समुझाइ | समझाकर | with a clear explanation |
2 जातें होइ चरन रति सोक मोह भ्रम जाइ।।14।।
जिससे आपके चरणों में प्रेम हो और शोक, मोह तथा भ्रम दूर हो जाएँ।
English explanation
So that love for your feet may arise, and sorrow, delusion, and confusion may pass away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जातें | जिससे | so that; through which |
| होइ | उत्पन्न हो | may arise |
| चरन | आपके चरणों में | for your feet |
| रति | प्रेम | love |
| सोक | शोक | sorrow |
| मोह | मोह; विवेक ढकने वाली आसक्ति | delusion; clouding attachment |
| भ्रम | भ्रम | confusion |
| जाइ | दूर हो जाएँ | may pass away |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 14
- स्रोत अभिलेख
- 3.14
- सहायक विषय
- पञ्चवटी-निवास और श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 638, 639
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।