अरण्यकाण्ड · दोहा 26 · दोहा
मम पाछें धर धावत धरें सरासन बान।
मम पाछें धर धावत धरें सरासन बान।
फिरि फिरि प्रभुहि बिलोकिहउँ धन्य न मो सम आन॥ २६॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.26 · पुस्तक पृ. 654, 654
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1मम पाछें धर धावत धरें सरासन बान।
धनुष और बाण धारण किए प्रभु मेरे पीछे पृथ्वी पर दौड़ेंगे।
English explanation
Holding bow and arrows, the Lord will run after me upon the earth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मम | मेरे | my |
| पाछें | पीछे | behind; after |
| धर | धरती पर | upon the earth |
| धावत | दौड़ते हुए | running |
| धरें | धारण किए हुए | holding |
| सरासन | धनुष | bow |
| बान | बाण | arrows |
2फिरि फिरि प्रभुहि बिलोकिहउँ धन्य न मो सम आन॥ २६॥
मैं बार-बार मुड़कर प्रभु को देखूँगा; मेरे समान धन्य कोई दूसरा नहीं होगा।
English explanation
Turning back again and again, I shall behold the Lord; no other will be as blessed as I.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फिरि | मुड़कर | turning back |
| फिरि | फिर से | again |
| प्रभुहि | प्रभु राम को | the Lord Rama |
| बिलोकिहउँ | मैं देखूँगा | I shall behold |
| धन्य | धन्य; सौभाग्यशाली | blessed; fortunate |
| न | नहीं | not |
| मो | मेरे | me |
| सम | समान | equal to |
| आन | कोई दूसरा | any other |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा 26
- स्रोत अभिलेख
- 3.26
- सहायक विषय
- मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 654, 654
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।