अरण्यकाण्ड · दोहा 33 · दोहा/सोरठा
मन क्रम बचन कपट तजि जो कर भूसुर सेव।
मन क्रम बचन कपट तजि जो कर भूसुर सेव।
मोहि समेत बिरंचि सिव बस ताकें सब देव।।33।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.33 · पुस्तक पृ. 665, 665
भावार्थ और शब्दार्थ
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1मन क्रम बचन कपट तजि जो कर भूसुर सेव।
जो मन, कर्म और वचन में कपट छोड़कर ब्राह्मणों की सेवा करता है—
English explanation
Whoever serves Brahmins, abandoning deceit in thought, action, and speech—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन से; विचार में | in mind; in thought |
| क्रम | कर्म से; आचरण में | in action; in conduct |
| बचन | वचन से; बोलने में | in speech |
| कपट | छल; कपट | deceit; hypocrisy |
| तजि | छोड़कर | having abandoned |
| जो | जो व्यक्ति | whoever |
| कर | करता है | performs; does |
| भूसुर | ब्राह्मणों की; पृथ्वी के देव कहे गए | of Brahmins, termed gods on earth |
| सेव | सेवा | service |
2 मोहि समेत बिरंचि सिव बस ताकें सब देव।।33।।
उसके वश में मेरे सहित ब्रह्मा, शिव और सभी देवता होते हैं।
English explanation
All the gods, including myself, Brahma, and Shiva, are won over by that person.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोहि | मुझे; वक्ता राम को | me; Rama, the speaker |
| समेत | सहित; शामिल करके | including; together with |
| बिरंचि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| सिव | भगवान शिव | Lord Shiva |
| बस | वश में; सेवा से जीते हुए | under sway; won over |
| ताकें | उसके; उस सेवक के | of that person; under that person’s |
| सब | सभी | all |
| देव | देवता | gods; deities |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 33
- स्रोत अभिलेख
- 3.33
- सहायक विषय
- कबन्ध-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 665, 665
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