अरण्यकाण्ड · दोहा 34 · दोहा/सोरठा
कंद मूल फल सुरस अति दिए राम कहुँ आनि।
कंद मूल फल सुरस अति दिए राम कहुँ आनि।
प्रेम सहित प्रभु खाए बारंबार बखानि।।34।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.34 · पुस्तक पृ. 666, 666
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कंद मूल फल सुरस अति दिए राम कहुँ आनि।
शबरी अत्यंत स्वादिष्ट कंद, मूल और फल लाकर राम को दिए।
English explanation
Shabari brought very delicious tubers, roots, and fruits and offered them to Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कंद | खाने योग्य कंद | edible tubers |
| मूल | जड़ें | roots |
| फल | फल | fruits |
| सुरस | स्वादिष्ट | delicious |
| अति | अत्यंत | very |
| दिए | दिए | offered |
| राम | राम | Rama |
| कहुँ | को | to |
| आनि | लाकर | having brought |
2 प्रेम सहित प्रभु खाए बारंबार बखानि।।34।।
प्रभु राम ने बार-बार उनकी प्रशंसा करते हुए उन्हें प्रेम से खाया।
English explanation
Lord Rama ate them with love, praising them again and again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रेम | प्रेम | love |
| सहित | के साथ | with |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| खाए | खाए | ate them |
| बारंबार | बार-बार | again and again |
| बखानि | प्रशंसा करके | praising them |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 34
- स्रोत अभिलेख
- 3.34
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 666, 666
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