अरण्यकाण्ड · दोहा 9 · दोहा/सोरठा
निसिचर हीन करउँ महि भुज उठाइ पन कीन्ह।
निसिचर हीन करउँ महि भुज उठाइ पन कीन्ह।
सकल मुनिन्ह के आश्रमन्हि जाइ जाइ सुख दीन्ह।।9।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.9 · पुस्तक पृ. 630, 630
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1निसिचर हीन करउँ महि भुज उठाइ पन कीन्ह।
राम ने भुजा उठाकर प्रतिज्ञा की: ‘मैं पृथ्वी को राक्षसों से रहित करूँगा।’
English explanation
Rama raised his arm and vowed, ‘I will rid the earth of demons.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निसिचर | राक्षसों से | of demons |
| हीन | रहित | free |
| करउँ | मैं करूँगा | I will make |
| महि | पृथ्वी को | the earth |
| भुज | भुजा | arm |
| उठाइ | उठाकर | raising |
| पन | प्रतिज्ञा | vow |
| कीन्ह | की | made |
2 सकल मुनिन्ह के आश्रमन्हि जाइ जाइ सुख दीन्ह।।9।।
राम ने सभी मुनियों के आश्रमों में एक-एक करके जाकर उन्हें सुख दिया।
English explanation
Rama visited the sages’ ashrams one after another and brought them comfort.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | सभी | all |
| मुनिन्ह | मुनियों | sages |
| के | के | of |
| आश्रमन्हि | आश्रमों में | to the ashrams |
| जाइ | जाकर | going |
| जाइ | एक-एक में जाकर | to each in turn |
| सुख | सुख | comfort |
| दीन्ह | दिया | gave |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 9
- स्रोत अभिलेख
- 3.9
- सहायक विषय
- राक्षस-वधकी प्रतिज्ञा करना
- मुद्रित पृष्ठ
- 630, 630
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।