अरण्यकाण्ड · दोहा 36 · दोहा
जाति हीन अघ जन्म महि मुक्त कीन्हि असि नारि।
जाति हीन अघ जन्म महि मुक्त कीन्हि असि नारि।
महामंद मन सुख चहसि ऐसे प्रभुहि बिसारि॥ ३६॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.36 · पुस्तक पृ. 667, 668
भावार्थ और शब्दार्थ
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1जाति हीन अघ जन्म महि मुक्त कीन्हि असि नारि।
पृथ्वी पर जाति से हीन मानी गई और पापमय जन्म वाली ऐसी स्त्री को भी राम ने मुक्त कर दिया।
English explanation
Rama liberated even such a woman on earth, described as low in caste and sinful by birth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाति | जाति की दृष्टि से | in terms of caste |
| हीन | हीन मानी गई | regarded as low |
| अघ | पापमय | sinful |
| जन्म | जन्म वाली | by birth |
| महि | पृथ्वी पर | on earth |
| मुक्त | मुक्त | liberated |
| कीन्हि | कर दिया | made; rendered |
| असि | ऐसी | such |
| नारि | स्त्री; यहाँ शबरी | woman; here, Shabari |
2 महामंद मन सुख चहसि ऐसे प्रभुहि बिसारि॥ ३६॥
हे अत्यंत मूर्ख मन! ऐसे प्रभु को भुलाकर तू सुख चाहता है?
English explanation
O utterly foolish mind! Do you seek happiness while forgetting such a Lord?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| महामंद | अत्यंत मूर्ख | utterly foolish |
| मन | हे मन | O mind |
| सुख | सुख | happiness |
| चहसि | तू चाहता है | you desire |
| ऐसे | ऐसे | such a |
| प्रभुहि | प्रभु को | the Lord |
| बिसारि | भुलाकर | having forgotten |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा 36
- स्रोत अभिलेख
- 3.36
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 667, 668
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।