अरण्यकाण्ड · दोहा 2 · दोहा/सोरठा
कीन्ह मोह बस द्रोह जद्यपि तेहि कर बध उचित।
मूल पाठ
कीन्ह मोह बस द्रोह जद्यपि तेहि कर बध उचित।
प्रभु छाड़ेउ करि छोह को कृपाल रघुबीर सम।।2।।
स्रोत अभिलेख 3.2 · पुस्तक पृ. 621, 622
भावार्थ
मूल पाठ के बादउसने मोहवश द्रोह किया था, इसलिये यद्यपि उसका वध ही उचित था, पर प्रभुने कृपा करके उसे छोड़ दिया। श्रीरामजीके समान कृपालु और कौन होगा?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 622 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1कीन्ह मोह बस द्रोह जद्यपि तेहि कर बध उचित।
English explanation
He had acted treacherously under delusion; although putting him to death was justified,
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कीन्ह | किया | committed |
| मोह | मोह; भ्रम | delusion |
| बस | के वश में | under the sway of |
| द्रोह | द्रोह; विरोधपूर्ण अपराध | treachery; a hostile offense |
| जद्यपि | यद्यपि | although |
| तेहि | उस | him |
| कर | का | of |
| बध | वध | killing |
| उचित | उचित था | was justified |
2 प्रभु छाड़ेउ करि छोह को कृपाल रघुबीर सम।।2।।
English explanation
The Lord showed compassion and spared him. Who is as merciful as Rama?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम ने | the Lord, Rama |
| छाड़ेउ | छोड़ दिया; प्राण बख्शे | released; spared |
| करि | करके | showing |
| छोह | दया | compassion |
| को | कौन | who |
| कृपाल | कृपालु | merciful |
| रघुबीर | रघुवीर राम | Rama, hero of Raghu’s line |
| सम | के समान | as |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 2
- स्रोत अभिलेख
- 3.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 622
- सहायक विषय
- जयन्तकी कुटिलता और फलप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 621, 622
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।