अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निज कृत कर्म जनित फल पायउँ। अब प्रभु पाहि सरन तकि आयउँ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअपने किये हुए कर्मसे उत्पन्न हुआ फल मैंने पा लिया। अब हे प्रभु! मेरी रक्षा कीजिये। मैं आपकी शरण तककर आया हूँ। [शिवजी कहते हैं—] हे पार्वती! कृपालु श्रीरघुनाथजीने उसकी अत्यन्त आत्र्त [दु:खभरी] वाणी सुनकर उसे एक आँखका काना करके छोड़ दिया॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 622 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
निज कृत कर्म जनित फल पायउँ। अब प्रभु पाहि सरन तकि आयउँ।।
सुनि कृपाल अति आरत बानी। एकनयन करि तजा भवानी।।
स्रोत अभिलेख 3.2 · पुस्तक पृ. 621, 622
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 निज कृत कर्म जनित फल पायउँ। अब प्रभु पाहि सरन तकि आयउँ।।
English explanation
I have received the consequence of my own deed. Now, Lord, protect me; I have come seeking your refuge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने | my own |
| कृत | किए हुए | done |
| कर्म | कर्म से | by the deed |
| जनित | उत्पन्न | produced |
| फल | फल; परिणाम | consequence |
| पायउँ | मैंने पाया | I have received |
| अब | अब | now |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| पाहि | रक्षा कीजिए | protect me |
| सरन | शरण | refuge |
| तकि | की आशा करके; चाहकर | seeking; looking for |
| आयउँ | मैं आया हूँ | I have come |
2 सुनि कृपाल अति आरत बानी। एकनयन करि तजा भवानी।।
English explanation
O Bhavani, hearing his deeply distressed plea, compassionate Rama left him with one eye and let him go.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | hearing |
| कृपाल | कृपालु राम ने | compassionate Rama |
| अति | अत्यंत | deeply |
| आरत | दुखभरी; व्याकुल | distressed |
| बानी | वाणी; पुकार | words; plea |
| एकनयन | एक आँख वाला | one-eyed |
| करि | करके | making |
| तजा | छोड़ दिया | let him go |
| भवानी | हे भवानी, पार्वती | O Bhavani, Parvati |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 622
- सहायक विषय
- जयन्तकी कुटिलता और फलप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 621, 622
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।