अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आतुर सभय गहेसि पद जाई। त्राहि त्राहि दयाल रघुराई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दआतुर और भयभीत जयन्तने जाकर श्रीरामजीके चरण पकड़ लिये [और कहा—] हे दयालु रघुनाथजी! रक्षा कीजिये, रक्षा कीजिये। आपके अतुलित बल और आपकी अतुलित प्रभुता (सामथ्र्य)-को मैं मन्दबुद्धि जान नहीं पाया था॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 621 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
आतुर सभय गहेसि पद जाई। त्राहि त्राहि दयाल रघुराई।।
अतुलित बल अतुलित प्रभुताई। मैं मतिमंद जानि नहिं पाई।।
स्रोत अभिलेख 3.2 · पुस्तक पृ. 621, 622
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 आतुर सभय गहेसि पद जाई। त्राहि त्राहि दयाल रघुराई।।
English explanation
Distressed and afraid, Jayanta went and clasped Rama’s feet: ‘Save me, save me, compassionate Lord of Raghu’s line!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आतुर | व्याकुल | distressed |
| सभय | भयभीत | afraid |
| गहेसि | उसने पकड़ लिए | he clasped |
| पद | चरण | feet |
| जाई | जाकर | having gone |
| त्राहि | रक्षा कीजिए | save me |
| त्राहि | रक्षा कीजिए | save me |
| दयाल | हे दयालु | O compassionate one |
| रघुराई | हे रघुकुल के स्वामी राम | O Rama, Lord of Raghu’s line |
2 अतुलित बल अतुलित प्रभुताई। मैं मतिमंद जानि नहिं पाई।।
English explanation
Your strength is incomparable, and your sovereign power is incomparable; dull-witted as I am, I failed to understand it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अतुलित | अतुलनीय | incomparable |
| बल | बल | strength |
| अतुलित | अतुलनीय | incomparable |
| प्रभुताई | प्रभुता; सामर्थ्य | sovereign power |
| मैं | मैं | I |
| मतिमंद | मंदबुद्धि | dull-witted |
| जानि | समझ | understand |
| नहिं | नहीं | not |
| पाई | सका | was able to |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 621
- सहायक विषय
- जयन्तकी कुटिलता और फलप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 621, 622
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।