अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नारद देखा बिकल जयंता। लागि दया कोमल चित संता।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दनारदजीने जयन्तको व्याकुल देखा तो उन्हें दया आ गयी; क्योंकि संतोंका चित्त बड़ा कोमल होता है। उन्होंने उसे [समझाकर] तुरंत श्रीरामजीके पास भेज दिया। उसने [जाकर] पुकारकर कहा— हे शरणागतके हितकारी! मेरी रक्षा कीजिये॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 621 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नारद देखा बिकल जयंता। लागि दया कोमल चित संता।।
पठवा तुरत राम पहिं ताही। कहेसि पुकारि प्रनत हित पाही।।
स्रोत अभिलेख 3.2 · पुस्तक पृ. 621, 622
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नारद देखा बिकल जयंता। लागि दया कोमल चित संता।।
English explanation
Narada saw Jayanta distressed and felt compassion; the hearts of saints are tender.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नारद | देवर्षि नारद ने | the divine sage Narada |
| देखा | देखा | saw |
| बिकल | व्याकुल | distressed |
| जयंता | इंद्रपुत्र जयंत को | Jayanta, Indra’s son |
| लागि | उपजी; अनुभव हुई | arose; was felt |
| दया | दया | compassion |
| कोमल | कोमल | tender |
| चित | हृदय | hearts |
| संता | संतों के | of saints |
2 पठवा तुरत राम पहिं ताही। कहेसि पुकारि प्रनत हित पाही।।
English explanation
Narada sent him at once to Rama. He cried out, ‘O benefactor of those who seek refuge, protect me!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पठवा | भेज दिया | sent |
| तुरत | तुरंत | at once |
| राम | राम | Rama |
| पहिं | के पास | to |
| ताही | उसे, जयंत को | him, Jayanta |
| कहेसि | उसने कहा | he said |
| पुकारि | पुकारकर | crying out |
| प्रनत | शरण में आए लोगों के | of those seeking refuge |
| हित | हितैषी | benefactor |
| पाही | रक्षा कीजिए | protect me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 621
- सहायक विषय
- जयन्तकी कुटिलता और फलप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 621, 622
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।