अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रघुपति चित्रकूट बसि नाना। चरित किए श्रुति सुधा समाना।।
मूल पाठ
रघुपति चित्रकूट बसि नाना। चरित किए श्रुति सुधा समाना।।
बहुरि राम अस मन अनुमाना। होइहि भीर सबहिं मोहि जाना।।
स्रोत अभिलेख 3.3 · पुस्तक पृ. 622, 623
भावार्थ
मूल पाठ के बादचित्रकूटमें बसकर श्रीरघुनाथजीने बहुत-से चरित्र किये, जो कानोंको अमृतके समान [प्रिय] हैं। फिर (कुछ समय पश्चात्) श्रीरामजीने मनमें ऐसा अनुमान किया कि मुझे सब लोग जान गये हैं, इससे [यहाँ] बड़ी भीड़ हो जायगी॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 622 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 रघुपति चित्रकूट बसि नाना। चरित किए श्रुति सुधा समाना।।
English explanation
AI draft: While dwelling at Chitrakoot, Rama performed many deeds that were like nectar to the ears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| चित्रकूट | चित्रकूट में | at Chitrakoot |
| बसि | रहकर | having dwelt |
| नाना | अनेक प्रकार के | of many kinds |
| चरित | चरित; कार्य | deeds |
| किए | किए | performed |
| श्रुति | कानों के लिए; सुनने में | to the ears; in hearing |
| सुधा | अमृत | nectar |
| समाना | के समान | like |
2 बहुरि राम अस मन अनुमाना। होइहि भीर सबहिं मोहि जाना।।
English explanation
Then Rama thought to himself: There will be a crowd, for everyone has recognized me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर | then |
| राम | राम ने | Rama |
| अस | ऐसा | thus |
| मन | मन में | in his mind |
| अनुमाना | विचार किया; अनुमान लगाया | reasoned; considered |
| होइहि | होगी | will arise |
| भीर | भीड़ | a crowd |
| सबहिं | सभी ने | everyone |
| मोहि | मुझे | me |
| जाना | जान लिया; पहचान लिया | has recognized |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 622
- सहायक विषय
- अत्रि-मिलन एवं स्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 622, 623
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।