अरण्यकाण्ड · छंद · छंद
तन पुलक निर्भर प्रेम पुरन नयन मुख पंकज दिए।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमुनि अत्यन्त प्रेमसे पूर्ण हैं; उनका शरीर पुलकित है और नेत्रोंको श्रीरामजीके मुखकमलमें लगाये हुए हैं। [मनमें विचार रहे हैं कि] मैंने ऐसे कौन-से जप-तप किये थे, जिसके कारण मन, ज्ञान, गुण और इन्द्रियोंसे परे प्रभुके दर्शन पाये। जप, योग और धर्म-समूहसे मनुष्य अनुपम भक्तिको पाता है। श्रीरघुवीरके पवित्र चरित्रको तुलसीदास रात-दिन गाता है।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 628 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तन पुलक निर्भर प्रेम पुरन नयन मुख पंकज दिए।
मन ग्यान गुन गोतीत प्रभु मैं दीख जप तप का किए।।
जप जोग धर्म समूह तें नर भगति अनुपम पावई।
रधुबीर चरित पुनीत निसि दिन दास तुलसी गावई।।
स्रोत अभिलेख 3.6 · पुस्तक पृ. 627, 628
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1तन पुलक निर्भर प्रेम पुरन नयन मुख पंकज दिए।
English explanation
His body thrilled and brimmed with love; his tear-filled eyes were fixed on the Lord's lotus-like face.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तन | शरीर | body |
| पुलक | रोमांचित | thrilling with raised hairs |
| निर्भर | अत्यंत भरा हुआ | brimming |
| प्रेम | प्रेम से | with love |
| पुरन | भरे हुए | filled |
| नयन | नेत्र | eyes |
| मुख | मुख | face |
| पंकज | कमल पर | on the lotus |
| दिए | लगाए | fixed |
2 मन ग्यान गुन गोतीत प्रभु मैं दीख जप तप का किए।।
English explanation
I have beheld the Lord beyond mind, knowledge, qualities, and senses; what more is to be gained by chanting and austerity?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन | mind |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| गुन | गुण | qualities |
| गोतीत | इंद्रियों से परे | beyond the senses |
| प्रभु | प्रभु को | the Lord |
| मैं | मैंने | I |
| दीख | देखा | beheld |
| जप | मंत्र-जप | chanting |
| तप | तपस्या | austerity |
| का | क्या लाभ | what purpose |
| किए | करने से | by performing |
3 जप जोग धर्म समूह तें नर भगति अनुपम पावई।
English explanation
Through chanting, yoga, and manifold righteous practices, a person attains incomparable devotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जप | मंत्र-जप | chanting |
| जोग | योग-साधना | yogic practice |
| धर्म | धार्मिक आचरण | righteous practices |
| समूह | समूह; अनेक साधन | the multitude of practices |
| तें | से | through |
| नर | मनुष्य | a person |
| भगति | भक्ति | devotion |
| अनुपम | अतुलनीय | incomparable |
| पावई | पाता है | attains |
4 रधुबीर चरित पुनीत निसि दिन दास तुलसी गावई।।
English explanation
Tulsi, the servant, sings Rama's sacred deeds night and day.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रधुबीर | रघुवंश के वीर राम के | of Rama, hero of Raghu's lineage |
| चरित | चरित्र; लीलाएँ | deeds and life |
| पुनीत | पवित्र | sacred |
| निसि | रात | night |
| दिन | दिन | day |
| दास | सेवक | servant |
| तुलसी | कवि तुलसीदास | the poet Tulsidas |
| गावई | गाते हैं | sings |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 3.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 628
- सहायक विषय
- श्रीसीता-अनसूया-मिलन और श्रीसीताजीको अनसूयाजीका पातिव्रतधर्म कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 627, 628
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।