अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
केहि बिधि कहौं जाहु अब स्वामी। कहहु नाथ तुम्ह अंतरजामी।।
मूल पाठ
केहि बिधि कहौं जाहु अब स्वामी। कहहु नाथ तुम्ह अंतरजामी।।
अस कहि प्रभु बिलोकि मुनि धीरा। लोचन जल बह पुलक सरीरा।।
स्रोत अभिलेख 3.6 · पुस्तक पृ. 627, 628
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं किस प्रकार कहूँ कि हे स्वामी! आप अब जाइये? हे नाथ! आप अन्तर्यामी हैं, आप ही कहिये। ऐसा कहकर धीर मुनि प्रभुको देखने लगे। मुनिके नेत्रोंसे [प्रेमाश्रुओंका] जल बह रहा है और शरीर पुलकित है॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 627 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 केहि बिधि कहौं जाहु अब स्वामी। कहहु नाथ तुम्ह अंतरजामी।।
English explanation
Master, how can I say, 'Go now'? Lord, you know every heart; tell me yourself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| केहि | किस | what |
| बिधि | रीति से | in what manner |
| कहौं | मैं कहूँ | can I say |
| जाहु | जाइए | go |
| अब | अब | now |
| स्वामी | हे स्वामी | O master |
| कहहु | बताइए | tell me |
| नाथ | हे नाथ | O Lord |
| तुम्ह | आप | you |
| अंतरजामी | सबके अंतर की जानने वाले | knower of every heart |
2 अस कहि प्रभु बिलोकि मुनि धीरा। लोचन जल बह पुलक सरीरा।।
English explanation
Saying this, the steadfast sage gazed at the Lord; tears flowed from his eyes and his body thrilled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| प्रभु | प्रभु राम को | at Lord Rama |
| बिलोकि | देखकर | gazing |
| मुनि | मुनि | sage |
| धीरा | धीर; स्थिरचित्त | steadfast |
| लोचन | नेत्रों से | from the eyes |
| जल | आँसू | tears |
| बह | बहने लगे | flowed |
| पुलक | रोमांच | thrill; hair standing on end |
| सरीरा | शरीर में | in the body |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 627
- सहायक विषय
- श्रीसीता-अनसूया-मिलन और श्रीसीताजीको अनसूयाजीका पातिव्रतधर्म कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 627, 628
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।