अरण्यकाण्ड · छंद · छंद
कहि कथा सकल बिलोकि हरि मुख हृदयँ पद पंकज धरे।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसब कथा कहकर भगवान्के मुखके दर्शन कर, हृदयमें उनके चरणकमलोंको धारण कर लिया और योगाग्निसे देहको त्यागकर (जलाकर) वह उस दुर्लभ हरिपदमें लीन हो गयी, जहाँसे लौटना नहीं होता। तुलसीदासजी कहते हैं कि अनेकों प्रकारके कर्म, अधर्म और बहुत-से मत—ये सब शोकप्रद हैं; हे मनुष्यो! इनका त्याग कर दो और विश्वास करके श्रीरामजीके चरणोंमें प्रेम करो।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 668 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कहि कथा सकल बिलोकि हरि मुख हृदयँ पद पंकज धरे।
तजि जोग पावक देह हरि पद लीन भइ जहँ नहिं फिरे॥
नर बिबिध कर्म अधर्म बहु मत सोकप्रद सब त्यागहू।
बिस्वास करि कह दास तुलसी राम पद अनुरागहू॥
स्रोत अभिलेख 3.36 · पुस्तक पृ. 667, 668
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1कहि कथा सकल बिलोकि हरि मुख हृदयँ पद पंकज धरे।
English explanation
Having told her whole story and gazed upon Lord Rama’s face, Shabari held his lotus feet in her heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कहकर | having told |
| कथा | कथा; अपना वृत्तांत | story; her account |
| सकल | सारी | the whole |
| बिलोकि | देखकर | having gazed upon |
| हरि | भगवान राम का | of Lord Rama |
| मुख | मुख | face |
| हृदयँ | हृदय में | in her heart |
| पद | चरण | feet |
| पंकज | कमल | lotuses |
| धरे | धारण किए | held; enshrined |
2तजि जोग पावक देह हरि पद लीन भइ जहँ नहिं फिरे॥
English explanation
Leaving her body in the fire of yoga, she became absorbed at the Lord’s feet, from where there is no return.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तजि | त्यागकर | having relinquished |
| जोग | योग की | of yoga |
| पावक | अग्नि में | in the fire |
| देह | शरीर | body |
| हरि | भगवान के | of the Lord |
| पद | चरणों में | at the feet |
| लीन | लीन | absorbed |
| भइ | हो गई | became |
| जहँ | जहाँ से | from where |
| नहिं | नहीं | not |
| फिरे | फिर लौटते | return again |
3नर बिबिध कर्म अधर्म बहु मत सोकप्रद सब त्यागहू।
English explanation
O people, abandon the various deeds, unrighteous acts, and many doctrines—all of which bring sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नर | हे मनुष्यो | O people |
| बिबिध | विविध; अनेक प्रकार के | various |
| कर्म | कर्म | deeds; practices |
| अधर्म | अधर्म; अनुचित आचरण | unrighteous conduct |
| बहु | अनेक | many |
| मत | मत; सिद्धांत | doctrines; views |
| सोकप्रद | शोक देने वाले | sorrow-producing |
| सब | सभी | all |
| त्यागहू | त्याग दो | abandon |
4बिस्वास करि कह दास तुलसी राम पद अनुरागहू॥
English explanation
The servant Tulsi says: Have faith and love Rama’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिस्वास | विश्वास | faith; trust |
| करि | करके | having placed |
| कह | कहते हैं | says |
| दास | सेवक | servant; devotee |
| तुलसी | तुलसीदास, कवि | Tulsidas, the poet |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| पद | चरणों में | toward the feet |
| अनुरागहू | प्रेम करो | cherish love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 3.36
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 668
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 667, 668
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।