अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बार बार प्रभु पद सिरु नाई। प्रेम सहित सब कथा सुनाई।।
मूल पाठ
बार बार प्रभु पद सिरु नाई। प्रेम सहित सब कथा सुनाई।।
स्रोत अभिलेख 3.36 · पुस्तक पृ. 667, 668
भावार्थ
मूल पाठ के बादबार-बार प्रभुके चरणोंमें सिर नवाकर, प्रेमसहित उसने सब कथा सुनायी॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 668 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बार बार प्रभु पद सिरु नाई। प्रेम सहित सब कथा सुनाई।।
English explanation
Bowing her head repeatedly at the Lord’s feet, Shabari lovingly related the whole account.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार; फिर-फिर | after time; repeatedly |
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| पद | चरणों में | at the feet |
| सिरु | सिर | her head |
| नाई | नवाकर | having bowed |
| प्रेम | प्रेम | love |
| सहित | के साथ | with |
| सब | सारी | the entire |
| कथा | कथा; वृत्तांत | account |
| सुनाई | सुनाई | related |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.36
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 668
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 667, 668
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।