अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोइ अतिसय प्रिय भामिनि मोरे। सकल प्रकार भगति दृढ़ तोरें।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे भामिनि! मुझे वही अत्यन्त प्रिय है। फिर तुझमें तो सभी प्रकारकी भक्ति दृढ़ है। अतएव जो गति योगियोंको भी दुर्लभ है, वही आज तेरे लिये सुलभ हो गयी है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 668 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सोइ अतिसय प्रिय भामिनि मोरे। सकल प्रकार भगति दृढ़ तोरें।।
जोगि बृंद दुरलभ गति जोई। तो कहुँ आजु सुलभ भइ सोई।।
स्रोत अभिलेख 3.36 · पुस्तक पृ. 667, 668
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सोइ अतिसय प्रिय भामिनि मोरे। सकल प्रकार भगति दृढ़ तोरें।।
English explanation
O lady, that person is exceedingly dear to me. In you, every form of devotion is firmly established.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | that very person |
| अतिसय | अत्यंत | exceedingly |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| भामिनि | हे भामिनि; हे शबरी | O lady, Shabari |
| मोरे | मुझे | to me |
| सकल | सभी | all |
| प्रकार | रूपों की | forms of |
| भगति | भक्ति | devotion |
| दृढ़ | अटल | firmly established |
| तोरें | तुममें | in you |
2 जोगि बृंद दुरलभ गति जोई। तो कहुँ आजु सुलभ भइ सोई।।
English explanation
The spiritual state difficult for even hosts of yogis to attain has today become readily attainable for you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जोगि | योगियों के | of yogis |
| बृंद | समूह के लिए | for hosts |
| दुरलभ | दुर्लभ | hard to attain |
| गति | आध्यात्मिक अवस्था | spiritual state |
| जोई | जो | which |
| तो | तुम्हारे | you |
| कहुँ | लिए | for |
| आजु | आज | today |
| सुलभ | सहज प्राप्त होने योग्य | readily attainable |
| भइ | हो गई | has become |
| सोई | वही | that very state |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.36
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 668
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 667, 668
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।