अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नवम सरल सब सन छलहीना। मम भरोस हियँ हरष न दीना।।
मूल पाठ
नवम सरल सब सन छलहीना। मम भरोस हियँ हरष न दीना।।
नव महुँ एकउ जिन्ह के होई। नारि पुरुष सचराचर कोई।।
स्रोत अभिलेख 3.36 · पुस्तक पृ. 667, 668
भावार्थ
मूल पाठ के बादनवीं भक्ति है सरलता और सबके साथ कपटरहित बर्ताव करना, हृदयमें मेरा भरोसा रखना और किसी भी अवस्थामें हर्ष और दैन्य (विषाद) का न होना। इन नवोंमेंसे जिनके एक भी होती है, वह स्त्री-पुरुष, जड़-चेतन कोई भी हो—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 668 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नवम सरल सब सन छलहीना। मम भरोस हियँ हरष न दीना।।
English explanation
The ninth is simplicity and freedom from deceit toward everyone, reliance on me, and a heart neither elated nor dejected.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नवम | नौवीं भक्ति | the ninth form of devotion |
| सरल | सरल स्वभाव | simple and straightforward |
| सब | सभी के | everyone |
| सन | साथ; प्रति | toward |
| छलहीना | छल से रहित | free from deceit |
| मम | मुझ पर; राम पर | in me, Rama |
| भरोस | भरोसा | trust |
| हियँ | हृदय में | in the heart |
| हरष | हर्ष का उछाल | elation |
| न | न; न तो, न ही | neither; nor |
| दीना | दैन्य या विषाद | dejection or despondency |
2 नव महुँ एकउ जिन्ह के होई। नारि पुरुष सचराचर कोई।।
English explanation
Whoever possesses even one of these nine forms of devotion—whether a woman, a man, or any being, moving or unmoving—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नव | नौ भक्तियों | the nine forms of devotion |
| महुँ | में | among |
| एकउ | एक भी | even one |
| जिन्ह | जिनके | whoever |
| के | पास; में | possesses; in whom |
| होई | हो | is present |
| नारि | स्त्री | a woman |
| पुरुष | पुरुष | a man |
| सचराचर | चर और अचर प्राणी | moving and unmoving beings |
| कोई | कोई भी | anyone whatsoever |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.36
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 668
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 667, 668
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।