अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सातवँ सम मोहि मय जग देखा। मोतें संत अधिक करि लेखा।।
मूल पाठ
सातवँ सम मोहि मय जग देखा। मोतें संत अधिक करि लेखा।।
आठवँ जथालाभ संतोषा। सपनेहुँ नहिं देखइ परदोषा।।
स्रोत अभिलेख 3.36 · पुस्तक पृ. 667, 668
भावार्थ
मूल पाठ के बादसातवीं भक्ति है जगत्भरको समभावसे मुझमें ओतप्रोत (राममय) देखना और संतोंको मुझसे भी अधिक करके मानना। आठवीं भक्ति है जो कुछ मिल जाय उसीमें संतोष करना और स्वप्रमें भी पराये दोषोंको न देखना॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 667 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सातवँ सम मोहि मय जग देखा। मोतें संत अधिक करि लेखा।।
English explanation
The seventh is to see the world impartially as pervaded by me, and to esteem saints even more highly than me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सातवँ | सातवीं भक्ति | the seventh form of devotion |
| सम | समदृष्टि से | with equal vision |
| मोहि | मुझसे; राम से | by me, Rama |
| मय | व्याप्त | pervaded |
| जग | संसार | the world |
| देखा | देखना | to see |
| मोतें | मुझसे | than me |
| संत | संतों को | saints |
| अधिक | अधिक श्रेष्ठ | more highly |
| करि | मानकर | regarding as |
| लेखा | मानना | to esteem |
2 आठवँ जथालाभ संतोषा। सपनेहुँ नहिं देखइ परदोषा।।
English explanation
The eighth is contentment with whatever one receives and not looking for others’ faults even in a dream.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आठवँ | आठवीं भक्ति | the eighth form of devotion |
| जथालाभ | जो मिले उसी में | with whatever is received |
| संतोषा | संतोष | contentment |
| सपनेहुँ | स्वप्न में भी | even in a dream |
| नहिं | नहीं | not |
| देखइ | देखता है | looks for |
| परदोषा | दूसरों के दोष | others’ faults |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.36
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 667
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 667, 668
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।