अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मंत्र जाप मम दृढ़ बिस्वासा। पंचम भजन सो बेद प्रकासा।।
मूल पाठ
मंत्र जाप मम दृढ़ बिस्वासा। पंचम भजन सो बेद प्रकासा।।
छठ दम सील बिरति बहु करमा। निरत निरंतर सज्जन धरमा।।
स्रोत अभिलेख 3.36 · पुस्तक पृ. 667, 668
भावार्थ
मूल पाठ के बादमेरे (राम) मन्त्रका जाप और मुझमें दृढ़ विश्वास—यह पाँचवीं भक्ति है, जो वेदोंमें प्रसिद्ध है। छठी भक्ति है इन्द्रियोंका निग्रह, शील (अच्छा स्वभाव या चरित्र), बहुत कार्योंसे वैराग्य और निरंतर संत पुरुषोंके धर्म (आचरण) में लगे रहना॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 667 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मंत्र जाप मम दृढ़ बिस्वासा। पंचम भजन सो बेद प्रकासा।।
English explanation
Chanting the mantra and firm faith in me constitute the fifth form of devotion, proclaimed by the Vedas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंत्र | मंत्र का | of the sacred formula |
| जाप | जप | repeated recitation |
| मम | मुझमें; राम में | in me, Rama |
| दृढ़ | अटल | firm |
| बिस्वासा | विश्वास | faith |
| पंचम | पाँचवाँ | fifth |
| भजन | भक्ति का रूप | form of devotion |
| सो | वह | that |
| बेद | वेद | the Vedas |
| प्रकासा | प्रकट करते हैं | proclaim |
2 छठ दम सील बिरति बहु करमा। निरत निरंतर सज्जन धरमा।।
English explanation
The sixth is restraint of the senses, good conduct, detachment from manifold activities, and constant dedication to the righteous practices of good people.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छठ | छठी भक्ति | the sixth form of devotion |
| दम | इंद्रिय-संयम | restraint of the senses |
| सील | सुशील आचरण | good conduct |
| बिरति | विरक्ति | detachment |
| बहु | अनेक | many |
| करमा | कर्मों से | from activities |
| निरत | लगे रहना | being devoted to |
| निरंतर | लगातार | constantly |
| सज्जन | सज्जनों के | of virtuous people |
| धरमा | धर्माचरण में | in righteous practices |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.36
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 667
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 667, 668
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।