अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संग लाइ करिनीं करि लेहीं। मानहुँ मोहि सिखावनु देहीं।।
मूल पाठ
संग लाइ करिनीं करि लेहीं। मानहुँ मोहि सिखावनु देहीं।।
सास्त्र सुचिंतित पुनि पुनि देखिअ। भूप सुसेवित बस नहिं लेखिअ।।
स्रोत अभिलेख 3.37 · पुस्तक पृ. 669, 670
भावार्थ
मूल पाठ के बादहाथी हथिनियोंको साथ लगा लेते हैं। वे मानो मुझे शिक्षा देते हैं [कि स्त्रीको कभी अकेली नहीं छोडऩा चाहिये]। भलीभाँति चिन्तन किये हुए शास्त्रको भी बार-बार देखते रहना चाहिये। अच्छी तरह सेवा किये हुए भी राजाको वशमें नहीं समझना चाहिये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 669 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 संग लाइ करिनीं करि लेहीं। मानहुँ मोहि सिखावनु देहीं।।
English explanation
The elephants keep their female mates close beside them, as though giving me a lesson.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संग | साथ | alongside |
| लाइ | लगाकर | bringing close |
| करिनीं | हथिनियों को | the female elephants |
| करि | हाथी | male elephants |
| लेहीं | ले लेते हैं | take; keep |
| मानहुँ | मानो | as though |
| मोहि | मुझे | to me |
| सिखावनु | सीख | a lesson |
| देहीं | देते हैं | give |
2 सास्त्र सुचिंतित पुनि पुनि देखिअ। भूप सुसेवित बस नहिं लेखिअ।।
English explanation
Even a thoroughly considered scripture should be consulted repeatedly; even a well-served king should not be reckoned under one’s control.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सास्त्र | शास्त्र | scripture |
| सुचिंतित | भलीभाँति विचार किया हुआ | thoroughly considered |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| देखिअ | देखना चाहिए | should be consulted |
| भूप | राजा | king |
| सुसेवित | जिसकी अच्छी सेवा की गई हो | well served |
| बस | वश में | under one’s control |
| नहिं | नहीं | not |
| लेखिअ | समझना चाहिए | should be reckoned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.37
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 669
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 669, 670
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।