अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हमहि देखि मृग निकर पराहीं। मृगीं कहहिं तुम्ह कहँ भय नाहीं।।
मूल पाठ
हमहि देखि मृग निकर पराहीं। मृगीं कहहिं तुम्ह कहँ भय नाहीं।।
तुम्ह आनंद करहु मृग जाए। कंचन मृग खोजन ए आए।।
स्रोत अभिलेख 3.37 · पुस्तक पृ. 669, 670
भावार्थ
मूल पाठ के बादहमें देखकर [जब डरके मारे] हिरनोंके झुंड भागने लगते हैं, तब हिरनियाँ उनसे कहती हैं— तुमको भय नहीं है। तुम तो साधारण हिरनोंसे पैदा हुए हो, अत: तुम आनन्द करो। ये तो सोनेका हिरन खोजने आये हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 669 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 हमहि देखि मृग निकर पराहीं। मृगीं कहहिं तुम्ह कहँ भय नाहीं।।
English explanation
Seeing us, the herds of deer flee; the does say, ‘You have nothing to fear.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हमहि | हमें | us |
| देखि | देखकर | seeing |
| मृग | हिरन | deer |
| निकर | झुंड | herds |
| पराहीं | भाग जाते हैं | flee |
| मृगीं | हिरनियाँ | does |
| कहहिं | कहती हैं | say |
| तुम्ह | तुम | you |
| कहँ | को | to; for |
| भय | डर | fear |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
2 तुम्ह आनंद करहु मृग जाए। कंचन मृग खोजन ए आए।।
English explanation
‘Deer, go and enjoy yourselves; these men have come to seek the golden deer.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | तुम | you |
| आनंद | आनंद | enjoyment |
| करहु | करो | have; enjoy |
| मृग | हे हिरनो | O deer |
| जाए | जाकर | having gone; go |
| कंचन | सोने का | golden |
| मृग | हिरन | deer |
| खोजन | खोजने के लिए | to search for |
| ए | ये दोनों | these two |
| आए | आए हैं | have come |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.37
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 669
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 669, 670
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।