अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लछिमन कर प्रथमहिं लै नामा। पाछें सुमिरेसि मन महुँ रामा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपहले लक्ष्मणजीका नाम लेकर उसने पीछे मनमें श्रीरामजीका स्मरण किया। प्राण त्याग करते समय उसने अपना (राक्षसी) शरीर प्रकट किया और प्रेमसहित श्रीरामजीका स्मरण किया॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 656 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
लछिमन कर प्रथमहिं लै नामा। पाछें सुमिरेसि मन महुँ रामा।।
प्रान तजत प्रगटेसि निज देहा। सुमिरेसि रामु समेत सनेहा।।
स्रोत अभिलेख 3.27 · पुस्तक पृ. 655, 656
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 लछिमन कर प्रथमहिं लै नामा। पाछें सुमिरेसि मन महुँ रामा।।
English explanation
Maricha first cried out Lakshmana’s name, then remembered Rama in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लछिमन | लक्ष्मण | Lakshmana |
| कर | का | of |
| प्रथमहिं | सबसे पहले | first of all |
| लै | लेकर | taking; uttering |
| नामा | नाम | name |
| पाछें | बाद में | afterward |
| सुमिरेसि | उसने स्मरण किया | he remembered |
| मन | मन | mind; heart |
| महुँ | में | in |
| रामा | राम को | Rama |
2 प्रान तजत प्रगटेसि निज देहा। सुमिरेसि रामु समेत सनेहा।।
English explanation
As he gave up his life, Maricha revealed his own true body and remembered Rama with love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रान | प्राण | life |
| तजत | त्यागते समय | while giving up |
| प्रगटेसि | उसने प्रकट किया | he revealed |
| निज | अपना | his own |
| देहा | शरीर | body |
| सुमिरेसि | उसने स्मरण किया | he remembered |
| रामु | राम को | Rama |
| समेत | सहित | with |
| सनेहा | प्रेम | love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 656
- सहायक विषय
- मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 655, 656
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।