अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मोहि समुझाइ कहहु सोइ देवा। सब तजि करौं चरन रज सेवा।।
मूल पाठ
मोहि समुझाइ कहहु सोइ देवा। सब तजि करौं चरन रज सेवा।।
कहहु ग्यान बिराग अरु माया। कहहु सो भगति करहु जेहिं दाया।।
स्रोत अभिलेख 3.14 · पुस्तक पृ. 638, 639
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे देव! मुझे समझाकर वही कहिये, जिससे सब छोड़कर मैं आपकी चरणरजकी ही सेवा करूँ। ज्ञान, वैराग्य और मायाका वर्णन कीजिये; और उस भक्तिको कहिये जिसके कारण आप दया करते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 639 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मोहि समुझाइ कहहु सोइ देवा। सब तजि करौं चरन रज सेवा।।
English explanation
O Lord, explain that to me so that, leaving everything else, I may serve the dust of your feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोहि | मुझे | to me |
| समुझाइ | समझाकर | explaining clearly |
| कहहु | बताइए | tell |
| सोइ | वही बात | that very thing |
| देवा | हे देव | O Lord |
| सब | सब कुछ | everything else |
| तजि | त्यागकर | having renounced |
| करौं | मैं करूँ | I may perform |
| चरन | आपके चरणों की | of your feet |
| रज | धूल | dust |
| सेवा | सेवा | service |
2 कहहु ग्यान बिराग अरु माया। कहहु सो भगति करहु जेहिं दाया।।
English explanation
Explain knowledge, dispassion, and maya; also explain that devotion through which you bestow compassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहु | समझाइए | explain |
| ग्यान | ज्ञान | spiritual knowledge |
| बिराग | वैराग्य; आसक्ति से मुक्ति | dispassion; freedom from attachment |
| अरु | और | and |
| माया | माया | maya, the power of illusion |
| कहहु | बताइए | explain |
| सो | वह | that |
| भगति | भक्ति | devotion |
| करहु | आप करते हैं | you bestow |
| जेहिं | जिससे | through which |
| दाया | दया | compassion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 639
- सहायक विषय
- पञ्चवटी-निवास और श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 638, 639
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