अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एक बार प्रभु सुख आसीना। लछिमन बचन कहे छलहीना।।
मूल पाठ
एक बार प्रभु सुख आसीना। लछिमन बचन कहे छलहीना।।
सुर नर मुनि सचराचर साईं। मैं पूछउँ निज प्रभु की नाई।।
स्रोत अभिलेख 3.14 · पुस्तक पृ. 638, 639
भावार्थ
मूल पाठ के बादएक बार प्रभु श्रीरामजी सुखसे बैठे हुए थे। उस समय लक्ष्मणजीने उनसे छलरहित (सरल) वचन कहे—हे देवता, मनुष्य, मुनि और चराचरके स्वामी! मैं अपने प्रभुकी तरह (अपना स्वामी समझकर) आपसे पूछता हूँ॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 639 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 एक बार प्रभु सुख आसीना। लछिमन बचन कहे छलहीना।।
English explanation
Once, while Lord Rama was seated at ease, Lakshmana spoke sincere words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक | one |
| बार | अवसर पर | occasion |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| सुख | सुखपूर्वक | at ease |
| आसीना | बैठे हुए थे | was seated |
| लछिमन | लक्ष्मण ने, राम के छोटे भाई ने | Lakshmana, Rama's younger brother |
| बचन | वचन | words |
| कहे | कहे | spoke |
| छलहीना | छलरहित; निष्कपट | sincere; without deceit |
2 सुर नर मुनि सचराचर साईं। मैं पूछउँ निज प्रभु की नाई।।
English explanation
O master of gods, humans, sages, and all moving and unmoving creation! I ask you as my own lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुर | देवताओं के | of the gods |
| नर | मनुष्यों के | of humans |
| मुनि | मुनियों के | of sages |
| सचराचर | समस्त चर-अचर जगत के | of all moving and unmoving creation |
| साईं | हे स्वामी | O master |
| मैं | मैं | I |
| पूछउँ | पूछता हूँ | ask |
| निज | अपने | my own |
| प्रभु | प्रभु | lord |
| की | के | of |
| नाई | समान; के रूप में | as; in the capacity of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 639
- सहायक विषय
- पञ्चवटी-निवास और श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 638, 639
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।